झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): हवेलियां केवल चूने पत्थर की ही नहीं बनी होतीं, यह संस्कारों की गवाही देती हैं। यह संस्कार ही हैं कि यहां के उद्योगपति शिक्षा के लिए साधन, भवन, धन व सामर्थ्य यहां लगाकर मातृभूमि के लिए ऋण अदायगी का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। यह बात राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष (राज्य मंत्री दर्जा) ओंकार सिंह लखावत ने गुरुवार को नवलगढ़ के एक निजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में अपने उद्बोधन में कही। उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार शेखावाटी की हवेलियों के संरक्षण के लिए हवेली धारकों के साथ बैठक बुला चुकी है। हवेलियों के संरक्षण के संबंध में अधिकारियों की एक पूरी टीम काम कर रही है। उन्होंने मातृभूमि को स्वर्ग से भी महान बताते हुए युवाशक्ति से कहा कि अपनी मातृभूमि को कभी मत भूलना। उन्होंने शिक्षा दान को सबसे बड़ा दान बताते हुए कहा कि शिक्षण संस्थाओं का कर्तव्य है कि वह ऐसा नागरिक बनाएं, जो स्वाभिमान से खड़े हो सके क्योंकि नागरिक मजबूत होंगे तभी देश मजबूत होगा।
*प्रदर्शनी में विद्यार्थियों से किया संवाद*
धरोहर प्राधिकरण अध्यक्ष लखावत ने इस दौरान निजी कॉलेज में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी का भी उद्घाटन करते हुए विद्यार्थियों से उनके द्वारा बनाए गए मॉडल्स के बारे में विस्तार से जानकारी लेते हुए संवाद किया। उन्होंने विभिन्न मॉडल्स की बारीकियों के बारे में सहजता के साथ विद्यार्थियों से पूछा और उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि ‘‘राजस्थान के उस दौर में जब शिक्षा के केंद्र नगण्य थे, तब ट्रस्ट ने नवलगढ़ में ज्ञान का प्रकाश फैलाया। हम सभी इस संस्थान के ऋणी हैं। हम इस विरासत को और मजबूत करें, ताकि हमारे विद्यार्थी स्वरोजगार, आर्थिक राजनीतिक सामाजिक क्षेत्र में पहचान स्थापित कर सकें।‘‘