रामकथा के सुरों में झूमी चिड़ावा की जनता, जन्मे 'राम' हृदयों में

AYUSH ANTIMA
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चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): चिड़ावा के रेलवे स्टेशन स्थित श्री दुर्गा मंदिर में श्री मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीरामकथा के दूसरे दिन की कथा ने भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का अनुपम वातावरण निर्मित कर दिया। कथा में श्रीराम के अवतरण का आध्यात्मिक कारण, देवर्षि नारद का मोह प्रसंग और प्रभु श्रीराम के जन्म की भावपूर्ण झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। कथा वाचक वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने भगवान के अवतार की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब संसार में अधर्म बढ़ता है और धर्म संकट में पड़ता है, तब ईश्वर स्वयं मानव रूप में अवतरित होकर धर्म की पुनः स्थापना करते हैं। उन्होंने कहा, "राम का अवतार राक्षसों के विनाश तक सीमित नहीं था। उन्होंने मानवीय जीवन में मर्यादा, करुणा, त्याग और सेवा जैसे मूल्यों की पुनर्प्रतिष्ठा की।" उन्होंने श्रीराम के चरित्र को जीवन का मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि वे एक आदर्श गृहस्थ, आदर्श पुत्र, आदर्श भाई और आदर्श राजा थे। उनका जीवन दर्शाता है कि सत्ता में बैठा व्यक्ति अपने सुख से ऊपर उठकर समाज के कल्याण को प्राथमिकता दे सकता है। नारद मोह प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि यह प्रसंग केवल एक कथा नहीं, बल्कि जीवन की गहराइयों में छिपे अहंकार के विनाश और आत्मज्ञान की ओर यात्रा का प्रतीक है। भगवान अपनी लीला के माध्यम से यह शिक्षा देते हैं कि जब तक जीवन में मोह और गर्व है, तब तक सच्चा ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता। कथा का चरम भावुक क्षण उस समय आया, जब श्रीराम जन्मोत्सव का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। जैसे ही राम जन्म का वृतांत आरंभ हुआ, पूरा पांडाल ‘जय सियाराम’ के नारों से गूंज उठा। श्रद्धालु पुष्पवर्षा करने लगे, महिलाएं पारंपरिक मंगल गीतों में मग्न हो गईं और कथा स्थल एक क्षण के लिए अयोध्या की अनुभूति देने लगा। कथा व्यास तिवाड़ी ने इस प्रसंग को आत्मिक स्पर्श देते हुए कहा, “राम केवल अयोध्या के नहीं, हर उस दिल में जन्म लेते हैं, जो निर्मल, श्रद्धा से परिपूर्ण और अहंकार से मुक्त हो। अगर मन में सच्ची भक्ति है, तो राम आज भी वहीं जन्म लेंगे।” इस अवसर पर श्री मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज चिड़ावा के अध्यक्ष राजेश सोनी भामा, माणकचन्द सोनी, सुभाष वर्मा, सुशील फतेहपुरिया, शंकर लाल सोनी, लीलाधर सोनी, राजू जांगिड़, गोपीराम सैनी, लाखन पंवार सहित काफी महिलाएं मौजूद रहीं। इस दौरान सुरेश शेखावत के संयोजन में राम लक्ष्मण की झांकी भी सजाई गई।

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