सबका जीवन जीने का अपना ढंग है।
सबके जीवन के अपने-अपने रंग है।
उनको अपने जीवन में रंग भरने दो।
जो चाहते हैं उन्मुक्त गगन में उड़ना,
उनको तुम स्वतंत्र उड़ने दो।
तुम क्या हासिल करना चाहते हो।
बंदिशे उन पर लगाकर के
बस अपनी ही इज्जत
दाव पर लगाओगे।
जो बात कहना चाहते हो तुम, वो नहीं समझा पाओगे।
वो बात गई वो समय गया,
जब बिना कहे लोग समझ जाते थे।
आंखों में हया होती थी,
मस्तक श्रद्धा से झुक जाते थे।
अभी वो दौर, दूर गया,
सब अपनी मर्जी के मालिक हैं।
कहे अनमोल तुम बढ़ो अपनी मंजिल पे, हम इस जग से वाकिफ है।
*डॉ.अनिल अनमोल*
पीएमश्री श्रीकृष्ण परिषद्
राजकीय बालिका उच्च
माध्यमिक विद्यालय, सूरजगढ़