जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): सरकार ने एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत कमर्शियल एलजीपी सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगा दी है। धीरे धीरे इसका असर व्यवसाय के साथ प्रदेश के औद्योगिक उत्पादन पर भी पड़ रहा है। फैडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री (फोर्टी) अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल का कहना है कि हमने प्रदेश के सभी प्रभावित उद्योगों से आंकड़े जुटाए हैं। यह बात काबिलेगौर हे कि व्यावसायिक उत्पादन के साथ औद्योगिक उत्पादन में भी एलपीजी का उतना ही उपयोग होता है। सरकार के प्रोत्साहन के बाद पिछले कुछ साल में जिन उद्योगों में कोयले या डीजल से चलने वाली भट्टियां भी अब इलैक्ट्रिक या एलपीजी से संचालित होती हैं, लेकिन सरकार के प्रोत्साहन के बाद ज्यादा उद्योगों में एलपीजी और इंडस्ट्रियल गैस का इस्तेमाल होने लगा है। इससे प्रदूषण कम होता है और उद्योगों की लागत कम होती है, लेकिन मुश्किल ये है कि ईरान, इजरायल-अमेरिका युद्ध के बाद एलपीजी सप्लाई सिस्टम गडबड़ाने से इन उद्योगों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
*फोर्टी के सुझाव*
- फोर्टी का सरकार को सुझाव है कि सरकार को गल्फ कंट्री के अलावा दूसरे देशों से एलपीजी की सप्लाई का विकल्प तलाशना चाहिए।
- ऐसेंशियल एक्ट के तहत व्यापारियों के साथ दंडात्मक नीति नहीं अपनाई जानी चाहिए।
- अनावश्यक जमाखोरी को रोका जाना चाहिए।
- प्राथमिकता के आधार पर उद्योग ओर व्यवसाय को एलपीजी सप्लाई जारी रखी जानी चाहिए।
*एलपीजी की आवश्यकता वाले उद्योग*
- सीमेंट इंडस्ट्री – भट्ठियों को चलाने और हीटिंग के लिए।
- स्टील और मेटल इंडस्ट्री – धातु पिघलाने, हीट ट्रीटमेंट और कटिंग में।
- ग्लास इंडस्ट्री – काँच बनाने की भट्टियों में लगातार हाई टेम्परेचर के लिए।
- सिरेमिक और टाइल्स इंडस्ट्री – टाइल्स और सिरेमिक को पकाने के लिए।
- टेक्सटाइल इंडस्ट्री – डाइंग, प्रोसेसिंग और बॉयलर चलाने में।
- फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री – बेकरी, ड्राइंग, स्टीम और प्रोसेसिंग में।
- फर्टिलाइज़र (उर्वरक) इंडस्ट्री – अमोनिया और यूरिया बनाने में नेच्यूरल गैस मुख्य कच्चा माल है।
- केमिकल इंडस्ट्री – कई तरह के केमिकल और पेट्रोकेमिकल बनाने में।
- पावर प्लांट – गैस से बिजली उत्पादन
- ऑटोमोबाइल सेक्टर – सीएनजी के रूप में वाहनों में।