निवाई (लाल चंद माली): शहर के जालंधर नाथ मंदिर से निकलने वाली ऐतिहासिक कोसी नदी इन दिनों भू-माफियाओं और नगर पालिका की कथित मिलीभगत के चलते विवादों के घेरे में है। करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को ठिकाने लगाने का एक ऐसा 'मास्टर प्लान' तैयार किया गया है, जिससे न केवल शहर का सौंदर्यकरण प्रभावित होगा, बल्कि भविष्य में सफाई और जलभराव जैसी बड़ी आपदाएं भी दस्तक दे सकती हैं।
*नक्शे से 40 फीट की रोड 'गायब', माफियाओं की बांहे खिलीं*
जानकारी के अनुसार, नगर पालिका ने इस नदी के पास 60 फीट जगह छोड़कर पट्टे जारी किए थे। नियमतः 20 फीट का नाला बनना था और उसके दोनों तरफ 20-20 फीट की चौड़ी सड़कें प्रस्तावित थीं लेकिन धरातल पर खेल कुछ और ही चल रहा है। पालिका मात्र 15 फीट का नाला बनवा रही है और सड़क का कहीं नामो-निशान नहीं है। चर्चा है कि सड़क न बनाकर भू-माफियाओं को सीधा रास्ता दिया जा रहा है ताकि वे नाले तक की जमीन को संबंधित प्लॉट धारकों को ऊंचे दामों में बेच सकें।
*सफाई का संकट: कैसे पहुंचेगी मशीन*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नाले के दोनों तरफ पक्की सड़क नहीं बनी, तो भविष्य में नाले की सफाई कैसे होगी। बिना सड़क के कचरा निकालने वाली मशीनें नाले तक नहीं पहुँच पाएंगी, जिससे नाला चोक होगा और बरसात में पूरे क्षेत्र में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाएगी। आखिर प्रशासन शहर को किस विनाश की ओर धकेल रहा है।
*अतिक्रमण को 'सुरक्षा कवच', रसूखदारों पर मेहरबानी*
क्षेत्र के सजग नागरिकों ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका प्रशासन छोटे-छोटे अतिक्रमण हटाने का दावा तो करता है, लेकिन नाले के पास रसूखदारों द्वारा बनाए गए अवैध कॉलम और चारदीवारियों को छूने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। अतिक्रमणों को न हटाना और सड़क निर्माण से हाथ खींचना, सीधे तौर पर भू-माफियाओं को "सुरक्षा कवच" प्रदान करने जैसा है।
*करोड़ों के वारे-न्यारे की तैयारी*
कोसी नदी के आसपास पहले ही अवैध कॉलोनियां काटी जा चुकी हैं और वर्तमान में भी यह खेल जारी है। सड़क के अभाव में खाली पड़ी सरकारी जमीन को करोड़ों में बेचने की तैयारी है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर किसके इशारे पर जनता के हक की 'सड़क' को माफियाओं की 'तिजोरी' में बदला जा रहा है।
*जवाब मांग रही है निवाई की जनता*
* 60 फीट की आरक्षित जगह में से सड़क का प्रावधान क्यों हटाया गया ?
* अवैध कॉलम और चारदीवारियों को ढहाने में पालिका को किसका डर है ?
* क्या जिला प्रशासन इस संभावित 'जमीन घोटाले' की उच्च स्तरीय जांच कराएगा ?