निवाई (लालचंद माली): निवाई शहर के वार्ड संख्या 17 और 37 में स्थित बेशकीमती चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रशासन की योजना धरी की धरी रह गई। आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) ने हमेशा सकारात्मक समाचार देने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में 06 मार्च को एक खबर "निवाई में सरकारी ज़मीनो की महालूट: वार्ड 17 और 37 में भू माफियाओ का ख़ूनी खेल" नाम से प्रकाशित हुई थी। जिसका असर प्रशासन एवं सचिवालय में बैठे अधिकारियो तक हुआ। चौंकाने वाली बात यह रही कि तहसीलदार नरेश कुमार गुर्जर के कार्यालय से जारी अति-गोपनीय आदेश धरातल पर उतरने से पहले ही 'लीक' हो गए। नतीजा यह हुआ कि कार्रवाई शुरू होने से पहले ही सैकड़ों लोग लामबंद होकर एसडीएम कार्यालय पहुंच गए और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
*कैसे उजागर हुई टीम की 'सीक्रेट' रणनीति*
सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि तहसीलदार कार्यालय से जारी वह सूची आखिर बाहर कैसे आई, जिसमें उन अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम थे, जिन्हें इस गुप्त कार्रवाई का हिस्सा बनाया गया था। इस 'लीक' ने न केवल प्रशासनिक गोपनीयता की धज्जियां उड़ाई हैं, बल्कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को भी संदिग्ध बना दिया है। चर्चा है कि विभाग के भीतर ही कुछ 'विभीषण' मौजूद हैं, जो भू-माफियाओं के लिए मुखबिरी का काम कर रहे हैं।
*दोहरी जिम्मेदारी, फिर भी बेखौफ माफिया*
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में तहसीलदार नरेश कुमार गुर्जर ही नगर पालिका के प्रशासक पद की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। इसके बावजूद चारागाह की सैकड़ों बीघा भूमि पर दिन-रात अवैध कब्जे और निर्माण कार्य धड़ल्ले से जारी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब रक्षक ही दोहरे प्रभार में हो और फिर भी माफिया बेखौफ हों, तो सिस्टम की नीयत पर सवाल उठना लाजिमी है।
*माफियाओं का खेल: 'कार्रवाई से पहले निर्माण'*
मौके का फायदा उठाकर भू-माफिया सरकारी जमीनों को कौड़ियों के दाम पर प्लॉट काटकर बेच रहे हैं। स्थिति यह है कि जब तक विभाग जागता है या कार्रवाई की फाइल आगे बढ़ती है, तब तक माफिया वहां पक्के निर्माण खड़े करवा देते हैं। स्थानीय प्रशासन की सुस्ती और सूचनाओं के लीक होने से सरकार को करोड़ों रुपये की चरागाह भूमि का नुकसान हो रहा है।
*अतिक्रमण रोकने का ज्ञापन*
निवाई कस्बे के वार्ड 37 से आए सैकड़ो लोगों ने एसडीएम प्रीति मीना को ज्ञापन सोपकर अतिक्रमण रोकने की मांग की।