रसोई गैस पर कोई संकट नहीं: सरकारी दावा उपभोक्ताओं द्वारा बुकिंग नहीं की जा रही

AYUSH ANTIMA
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राजस्थान सरकार बड़े बड़े दावे कर रही है कि खाड़ी युद्ध के चलते रसोई गैस पर कोई संकट नहीं है। सरकार ने आमजन को आगाह किया है कि घबराने वाली कोई बात नहीं है। यदि सरकारी दावे मे सच्चाई है तो फिर बुकिंग पर सिलेंडर की डिलीवरी क्यों नहीं दी जा रही है। विदित हो गैस एजेंसियो ने मोबाइल से बुकिंग की व्यवस्था कर रखी थी और खाड़ी संकट से पहले बुकिंग होते ही या दूसरे दिन उपभोक्ता के घर सिलेंडर पहुंच जाता था और उपभोक्ता को गैस एजेंसी के गौदाम पर जाने का झंझट नहीं रहता था। यदि गृह नगर पिलानी की बात करें तो गैस एजेंसी वाले भी वही रटी रटाई बात करते हैं कि रसोई गैस की कोई किल्लत नहीं है लेकिन जब मोबाइल पर दिये गये नंबर पर बुक करवाने की बात आती है तो वह नंबर ही बंद मिलता है जबकि खाड़ी युद्ध से संकट से पहले उसी नंबर पर बुकिंग होती थी। यही कारण है कि गैस एजेंसियों की गौदाम के बाहर लोगों की लाईन नजर आ रही है। अब सवाल यह उठता है कि जब सरकार दावे कर रही है कि रसोई गैस की कोई कमी नहीं है तो बुकिंग क्यों नहीं हो रही व सिलेंडरों की डिलीवरी क्यों नहीं हो रही, इसको लेकर सरकार को अपनी निति स्पष्ट करनी चाहिए। राजस्थान सरकार ने अपने शिकायत पोर्टल के नंबर जारी कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। 181 नंबर पर शिकायत करने से समस्या के समाधान की आशा करना बेमानी होगा। यदि इस समस्या में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में यह समस्या कानून व व्यवस्था में बिगडाव ला सकती है। सरकार चाहे कितने भी दावे करे कि रसोई गैस का कोई संकट नहीं है लेकिन धरातल पर देखा जाए तो सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण आमजन परेशानी का सामना कर रहा है। इसके साथ ही यह भी सुनने में आ रहा है कि सरकार ने एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरे सिलेंडर लेने के लिए 25 दिन निर्धारित कर दिए हैं लेकिन जिन उपभोक्ताओं के घर महीने में 2 सिलिंडर की खपत है, उसके लिए सरकार ने क्या सोचा है। इसी के साथ ही होटल व रेस्टोरेंट में कामर्शियल सिलैंडर की सप्लाई पर सरकार ने रोक लगा दी है, जिससे उनके सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है। राजस्थान में शादियों का सीजन भी चल रहा है, सिलेंडर न मिलने से अफरा तफरी का माहौल देखने को मिल रहा है। चाय की थड़ी वाले अपने परिवार का भरण पोषण करते थे, उनके लिए भी यह संकट का काल बन गया है। सरकार द्वारा रोजाना सोशल मीडिया के जरिये बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन यह दावे सच्चाई से कोसों दूर है।

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