एसकेआईटी, जयपुर में एआई, एमएल एवं कंप्यूटिंग पर 5 दिवसीय छात्र कार्यशाला (SWAMC-2026) का शुभारंभ

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): स्वामी केशवानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट एवं ग्रामोत्थान (एसकेआईटी), जयपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग एवं कंप्यूटिंग (SWAMC-2026)” विषय पर आयोजित 5 दिवसीय छात्र कार्यशाला का शुभारंभ 31 मार्च 2026 को किया गया। यह कार्यशाला 31 मार्च से 4 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML) एवं कंप्यूटिंग के उभरते क्षेत्रों में आवश्यक ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है। यह कार्यक्रम डॉ.धीरज जोशी, विभागाध्यक्ष, मैकेनिकल इंजीनियरिंग के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य अतिथि डॉ.गुंजन सोनी (एमएनआईटी, जयपुर) एवं प्रतिभागियों के स्वागत के साथ हुआ। इसके पश्चात डॉ.अचिन श्रीवास्तव, कार्यशाला समन्वयक ने कार्यशाला का विस्तृत परिचय देते हुए इसके उद्देश्यों, संरचना एवं अपेक्षित अधिगम परिणामों की जानकारी दी। उन्होंने आधुनिक इंजीनियरिंग में एआई एवं एमएल तकनीकों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को सक्रिय रूप से हैंड्स-ऑन लर्निंग में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उद्घाटन सत्र में डॉ.गुंजन सोनी द्वारा तकनीकी व्याख्यान प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने एआई एवं मशीन लर्निंग की मूल अवधारणाओं तथा उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों से विद्यार्थियों को परिचित कराया। कार्यशाला के अंतर्गत डेटा प्री-प्रोसेसिंग, मशीन लर्निंग मॉडल्स, वर्गीकरण तकनीकें तथा पाइथन के माध्यम से व्यावहारिक कार्यान्वयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है, जिससे प्रतिभागियों को सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों प्रकार का सुदृढ़ ज्ञान प्राप्त होगा। कार्यक्रम का समापन डॉ.दीपक कुमार, कार्यशाला समन्वयक द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने सभी वक्ताओं, आयोजकों, प्रतिभागियों एवं संस्थान प्रबंधन के सहयोग एवं समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। इस कार्यशाला में विभिन्न शाखाओं के विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली, जो उन्नत कंप्यूटिंग तकनीकों के प्रति उनकी गहरी रुचि को दर्शाती है। यह कार्यशाला एसकेआईटी, जयपुर की तकनीकी उत्कृष्टता एवं कौशल-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से प्रदर्शित करती है।

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