साध्वी ऋतम्भरा ने भागवत कथा में सुनाया कृष्ण जन्म का प्रसंग तो पूरा पांडाल गूंज उठा: नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की.

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (प्रमोद आचार्य): बीकानेर शहर के पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में चल रही साध्वी ऋतंभरा के भागवत कथा में भगवान श्री कृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया। आकाश में चमकती बिजली, बरसते मेघ, उफनती यमुना और चारों ओर फैला सन्नाटे के बीच नंदबाबा अपने लाल को सिर पर उठाए चले जा रहे थे। कुछ ऐसा ही नजारा था बुधवार को पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में सजीव हो उठा। वहां सनातन धर्म रक्षा समिति के बैनर तले चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को नंदोत्सव मनाया गया। साध्वी ऋतंभरा की कथा में जैसे ही कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया, वैसे ही पांडाल में खुशियां मनाने का दौर शुरू गया। पांडाल में नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की.... करीब पौन घंटे तक घंटियां, झालर और थालियां बजती रही। पांडाल में मौजूद लोग एक दूसरे को बधाइयां देते रहे और मुंह मीठा करवाते रहें।

*सनातन धर्म में हिंसा का कोई स्थान नहीं: साध्वी ऋतंभरा*

इससे पहले साध्वी ऋतंभरा ने कहा, मनुष्य की मुक्ति का सबसे भगवान का स्मरण करना है। भगवान का स्मरण तभी हो सकता है, जब मन स्वच्छ हो, मन में किसी तरह का कोई कपट न हो। साध्वी श्री ने कहा, सनातन धर्म ही ऐसा धर्म है, जिसमें हिंसा का कोई स्थान नहीं मिला, इसलिए आज सनातन धर्म की सबसे ज्यादा जरूरत है। साध्वी ऋतंभरा ने गजेन्द्र मोक्ष, समुद्र मंथन, भक्त प्रह्लाद, वामन अवतार सहित कई प्रसंग सुनाएं। 

*इन्होंने की आरती*

इससे पहले सुबह साध्वी ऋतंभरा के पहुंचने पर नारायण गहलोत, डीपी पच्चीसिया, डॉ.बीसी घीया, राजीव शर्मा, सुशील कुमार यादव, सुशील चांडक, बलदेव मूंधड़ा, महेश दम्माणी, केके सुथार, श्याम सोनी, दीपक देराश्री आदि ने श्रीमद्भागवत की आरती की।

*अब तीन दिन और दी जाएगी महायज्ञ में आहुतियां*

सनातन धर्म रक्षा समिति की ओर से बैनर तले हो रहे 51 कुंडीय विश्व शांति महायज्ञ में अब तीन दिनों तक ही आहुतियां दी जाएगी। यज्ञाचार्य पंडित सिद्धार्थ पुरोहित (बाला महाराज) ने बताया कि महायज्ञ के चौथे दिन पंडित जुगल किशोर ओझा पुजारी बाबा और दंडी स्वामी के सान्निध्य में आहुतियां दी गई। अब चार दिनों में शेष आहुतियां अब तीन दिनों में विश्व शांति के लिए करीब 69,000 आहुतियां दी जाएगी।

*सचेतक झांकियां भी सजाई*
                                            श्रीमद्भागवत कथा के दौरान सचेतक झांकियां सजाई गई। सबसे पहले वामन अवतार की झांकी सजाई गई। श्रीकृष्ण जन्म की झांकी के दौरान हर कोई हर्षित हुआ।

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