राजस्थान बजट से होमगार्ड कर्मियों में निराशा, अधूरी रह गई कई उम्मीदें

AYUSH ANTIMA
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दौसा (श्रीराम इंदौरिया): राजस्थान बजट 2026-27 को लेकर विभिन्न वर्गो की उम्मीदे और आलोचनाएं सामने आ रही है। जिसमें होमगार्ड जवानों की उपेक्षा को लेकर भी नाराजगी और सवाल उठे है। राज्य के होमगार्ड नियमित रोजगार व उचित मानदेय और सुविधाएं चाहते है। 

*होमगार्ड की नाराजगी के कारण*

होमगार्ड जवानों की और से जो नाराजगी सामने आई है, वह है नियमितीकरण और स्थाई रोजगार की मांग। होमगार्ड चाहते है कि विभाग में मौजूद स्थाई होमगार्ड कर्मचारियों की तरह उन्हें भी रोजगार के अधिकार मिले लेकिन बजट सत्र में इससे जुड़ी कोई ठोस घोषणा नही हुई।

*मानदेय और सुविधाओं पर सुधार की मांग*

होमगार्ड ने समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य सुविधाओं की मांग उठाई है, जो बजट में नही किया गया, जिससे उन्हें उपेक्षित महसूस हो रहा है।

*स्थानीय स्तर पर हजारों ज्ञापन सौंपे*

जिला सहित प्रदेशभर के जिलो में होमगार्ड ने पक्ष और विपक्ष के स्थानीय मंत्री विधायकों को हजारों ज्ञापन सौंपे है और विधानसभा में अपने हक के मुद्दों को उठाने हेतू लेकिन इन मांगों का बजट घोषणाओं में उल्लेख न होना नाराजगी का एक बड़ा कारण हो सकता है।

*पिछली सरकार में होमगार्ड का मानदेय बढ़ाने जैसे कदम उठाए*

पिछली सरकार में होमगार्ड के मानदेय में 10% की वृद्धि हुई लेकिन वर्ष 2026-27 के बजट में नियमित रोजगार व रोटेशन प्रथा को समाप्त करने और मानदेय बढ़ाने की कोई घोषणा न होने के कारण आज कई होमगार्ड को लगता है कि उनकी मुख्य मांगे नियमित रोजगार व बेहतर वेतन और सुविधाऐ बजट वर्ष 2026 में शामिल नही की गई, जिससे उन्हें उपेक्षा का अहसास हुआ है। इससे अलावा पिछली भर्ती कोर्ट में लंबित है, ऊपर से 5000 हजार होमगार्ड की भर्ती की घोषणा कर दी। मौजूदा होमगार्ड को नियमित रोजगार व बेहतर मानदेय और सुविधाओं की मांग बजट में शामिल नही रहने पर नाराजगी उठी है।

*वर्षो से होमगार्ड कर रहे सरकार से कई सुधार की मांग*

होमगार्ड वर्षो से सरकार से कई सुधार की मांग कर रहे है, जिन पर बजट वर्ष 2026-27 में अपेक्षित रूप से पर्याप्त ध्यान नही दिया गया। मांग के अनुसार होमगार्ड अपनी सेवा को स्वयंसेवक के बजाय विभाग के स्थाई होमगार्ड कर्मचारियों के रूप में मान्यता चाहते है ताकि नियमित रोजगार सेवा सुरक्षा और रोजगार से जुड़े लाभ मिल सकें। वर्तमान में राजस्थान सरकार होमगार्ड को स्वयंसेवक के रूप में मानती है न कि नियमित कर्मी के रूप में इस लिए पेंशन ईएसआई पीएफ डीए जैसे लाभ नही मिलते। इससे उनकी नौकरी की सुरक्षा और भविष्य की आर्थिक स्थिरता पर अनिश्चितता बनी रहती है। वे चाहते है कि सरकार होमगार्ड स्वयंसेवक पद नाम में आशिंक संशोधन कर नियमित कर्मचारी घोषित करे या उनकी सेवा को स्थाई दर्जा दे। पुलिस विभाग की तरफ होमगार्ड विभाग में भी एक समान कर्मचारी हो। होमगार्ड स्वयंसेवकों की नौकरी की निश्चितता और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित हो। होमगार्ड चाहते है कि समान काम के समान वेतन और रोजमर्रा के खर्चो को ध्यान में रखते हुए मानदेय के स्थान पर वेतन दें। होमगार्ड पर अभी तक पीएफ और ईएसआई जैसे लाभ लागू नही है क्योंकि होमगार्ड को स्वयंसेवक मानने के कारण ये लाभ नही दिए जा रहे है।

*न्यायालय के आदेश*

हाल ही में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि प्रत्येक होमगार्ड को प्रतिमाह न्यूनतम 28 दिन की ड्यूटी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही रोटेशन प्रणाली को समाप्त करने एवं होमगार्ड स्वयंसेवक के हित में कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। कोर्ट ने सरकार को तीन माह माना के भीतर अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे लेकिन निर्धारित समय के बाद सरकार को एकतरफा स्थगन आदेश मिल गया, जिससे होमगार्ड में नाराजगी है। जबकि याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता द्वारा पहले ही केविएट दाखिल कर रखी थी। न्यूनतम मासिक तैनाती और लाभ मिले। न्यायालय के आदेशों के अनुरूप सेवा की दशा और लाभ सुनिश्चित होने चाहिए। वहीं सेवा में पारदर्शिता हो भ्रष्टाचार के दबाव और रिश्वत की मांगों को रोका जाए। कई मामलो में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो एसीबी ने अधिकारियों को रिश्वत लेते पड़का। होमगार्ड को साफ व पारदर्शी और निष्पक्ष सेवा प्रणाली चाहिए, जिससे नौकरी या तैनाती के लिए रिश्वत जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े। कुछ सुधार हुए है पर बड़ी मांगे नियमित सेवा व सेवा लाभ और स्थाई नियुक्ति अब भी अधूरी है, इसलिए होमगार्ड में नाराज़गी का माहौल है।

*इनकी प्रतिक्रिया* 

राजस्थान के सभी होमगार्ड को राज्य सरकार के तीसरे बजट से काफी उम्मीदे थी जैसे नियमित रोजगार, समान वेतन, ग्रेच्यूटी, ईएसआई और पीएफ तथा 58 से 60 वर्ष वर्दी किट की जगह एक मुश्त राशि ट्रेनिंग के पैसे मे बढ़ोतरी डीए जैसे लेकिन राज्य सरकार की उपमुख्यमंत्री ने 5000 होमगार्ड की भर्ती की घोषणा करके होमगार्ड को मायूस किया है। बाकी गृह विभाग के बजट से अभी भी उम्मीद बाकी है।

*आनंद टोकसिया प्रदेशाध्यक्ष होमगार्ड समन्वय समिति जयपुर राजस्थान*
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