(आयुष अंतिमा नेटवर्क)
टेक्नोलॉजी की दुनिया में इन दिनों क्लाउड कोवर्क नाम का एक नया एआई टूल चर्चा में है। यह सिर्फ एक चैट करने वाला रोबोट नहीं है, बल्कि ऐसा डिजिटल सहायक है, जो कंप्यूटर में मौजूद फाइलों को पढ़ सकता है, लिख सकता है और उन्हें व्यवस्थित भी कर सकता है। यही वजह है कि इसके आने से टेक कंपनियों और शेयर बाजार में हलचल देखी गई। क्लाउड कोवर्क की खास बात यह है कि यह केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है। यह दस्तावेज़ तैयार कर सकता है, डेटा को व्यवस्थित कर सकता है, रिपोर्ट बना सकता है और साधारण कोड भी लिख सकता है। यानी जिन कामों के लिए पहले किसी कर्मचारी की जरूरत होती थी, उनमें से कई काम अब यह एआई टूल कुछ ही मिनटों में कर सकता है। इसी कारण निवेशकों को चिंता हुई कि अगर ऐसे एआई टूल तेजी से बढ़े, तो आईटी कंपनियों के पारंपरिक कामकाज पर असर पड़ सकता है। खबरों के अनुसार, अमेरिकी टेक कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। भारत में भी आईटी सेक्टर के शेयर नीचे आए। बाजार को डर है कि भविष्य में एआई सॉफ्टवेयर सेवाओं के पुराने मॉडल को बदल सकता है। हालांकि यह कहना गलत होगा कि एआई पूरी तरह इंजीनियरों की जगह ले लेगा। यह टूल मदद कर सकता है, लेकिन जटिल फैसले लेना, नई सोच विकसित करना और बड़ी जिम्मेदारी निभाना अभी भी इंसानों का ही काम है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एआई और इंसान मिलकर काम करेंगे। इससे काम की रफ्तार बढ़ेगी और कंपनियों की उत्पादकता भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, क्लाउड कोवर्क जैसे टूल तकनीक के बदलते दौर का संकेत हैं। शुरुआत में डर और भ्रम होना स्वाभाविक है, लेकिन हर नई तकनीक की तरह यह भी नए अवसर लेकर आ सकती है। जरूरत है कि लोग समय के साथ अपनी कौशल क्षमता बढ़ाएं और नई तकनीक को समझकर उसका सही उपयोग करें। (एआई जनित)