बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय असंचारी रोग कार्यान्वयन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर के मध्य एमओयू सम्पन्न

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (श्रीराम इंदौरिया): बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय, बीकानेर और आईसीएमआर-नेशनल इंस्टिट्यूट फ़ोर इम्प्लीमेंटेशन रिसर्च ऑन नॉन-कम्यूनिकेबल डीसीजीज़, जोधपुर (राष्ट्रीय असंचारी रोग कार्यान्वयन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर) के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर शुक्रवार को हस्ताक्षर किए गए। जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि यह समझौता आईसीएमआर, जोधपुर परिसर में आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान संपन्न हुआ।
इस एमओयू पर बीटीयू, बीकानेर की ओर से कुलगुरु प्रो.अखिल रंजन गर्ग तथा आईसीएमआर-एनआईआई आरएनसीडी, जोधपुर की ओर से निदेशक प्रो.पंकज भारद्वाज ने हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत दोनों संस्थान गैर-संचारी रोगों और उसमें तकनीकी सहयोग सहित विभिन्न उभरते शोध क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम, संयुक्त राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशाला तथा फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के आयोजन में सहयोग करेंगे। कुलपति प्रो.गर्ग ने इस अवसर पर कहा कि यह समझौता विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उच्चस्तरीय प्रयोगशाला सुविधाओं, विशेषज्ञ मार्गदर्शन एवं उद्योग-उन्मुख शोध अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे नवाचार, प्रौद्योगिकी विकास और समाजोपयोगी शोध को बढ़ावा मिलेगा। निदेशक डॉ.पंकज भारद्वाज ने अपने वक्तव्य में कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य (कम्युनिटी हेल्थ) के क्षेत्र में व्यापक एवं प्रभावी अनुसंधान की आवश्यकता है, जिससे जनस्वास्थ्य नीतियों को मजबूत आधार मिल सके। उन्होंने तकनीकी सहयोग की सहभागिता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के संयुक्त प्रयासों से ही समाज के समक्ष उपस्थित स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का प्रभावी समाधान संभव है। समारोह के दौरान बीटीयू की ओर से डॉ.गणेश प्रजापत, अधिष्ठाता, इंडस्ट्री-इंस्टिट्यूट-रिलेशन, डॉ.रानू लाल चौहान एवं डॉ.ऋतुराज सोनी उपस्थित रहे। वहीं आईसीएमआर-एनआईआईरड, जोधपुर की ओर से डॉ.प्रवीण कुमार आनंद, डॉ.जनेश कुमार गौतम सहित अन्य वैज्ञानिकगण मौजूद रहे। दोनों संस्थानों ने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी शोध उत्कृष्टता, अकादमिक आदान-प्रदान तथा कौशल विकास के नए आयाम स्थापित करेगी और क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा प्रदान करेगी।

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