इस बार महापौर के चुनाव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष*

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (हेम शर्मा): राजस्थान में हो सकता है कि फिर से महापौर का सीधे चुनाव हो। 2009 में महापौर का जनता ने सीधा चुनाव किया था। बीकानेर में कांग्रेस के भवानी शंकर शर्मा भाजपा के गोपाल गहलोत को हराकर सीधे महापौर बने थे। बताया जा रहा है कि महापौर का पार्षदों के मतों से चुनाव के दौरान पार्षदों की खरीद फरोख्त से भ्रष्टाचार रोकने के लिए सीधे चुनाव करवाए गए थे। सीधे चुनाव में भी समस्या आई कि महापौर तो किसी अन्य विचारधारा का और पार्षद दूसरी विचारधारा के होने से पांच साल तक बोर्ड में टकराव की स्थिति बनी रही। स्वायत शासन मंत्री का कहना है कि इसका कोई समाधान निकलता है तो सीधे चुनाव करवाएंगे अन्यथा पुराने फार्मूले पर ही चुनाव होगा। अशोक गहलोत सरकार ने महापौर का सीधा चुनाव करवाया था। बाद में वसुंधरा राजे सरकार पुराने फार्मूले पर लौट आई। 2026 निकाय चुनाव को लेकर सरकार को सुझाव है कि सीधे चुनाव करवाए जाए। अभी सरकार का फैसला आना है। राजस्थान में पहली बार शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव एक साथ कराने की तैयारी तो शुरू हो गई है, परन्तु अभी यह तय होना है कि महापौर के चुनाव सीधे होंगे या पार्षद महापौर का चुनाव करेंगे। हालांकि पार्टी में कई नेताओं ने सरकार को सुझाव दिया है कि महापौर का सीधा चुनाव करवाया जाए। राजस्थान सरकार पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव एक राज्य एक चुनाव नीति के तहत करवा रही है। वहीं इस चुनाव में शैक्षणिक योग्यता और दो से अधिक संतान होने पर चुनाव नहीं लड़ने का प्रतिबंध हटा दिया है। राज्य के तीन शहरों जयपुर, जोधपुर और कोटा में जहां दो-दो नगर निगम है, वहां वापस एक नगर निगम बनाने का प्रस्ताव है। स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग राज्य सरकार के निर्देश पर चुनाव की तैयारियों में जुटा है। 
मतदान की तिथियों को अंतिम रूप देना राज्य चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है। सभी नगर निकायों में पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों की जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार के आधार पर वार्डों का पुनर्गठन किया गया। इसके बाद मतदाता सूची का संशोधन किया गया है, आरक्षण की प्रक्रिया पूरी की जानी है। जिला कलेक्टर स्तर पर लॉटरी के माध्यम से यह तय किया जाएगा कि कौन से महापौर और पार्षद पद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षित होंगे। लॉटरी प्रणाली पारदर्शी तरीके से आरक्षण सुनिश्चित करेगी, जिससे सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। स्वायत शासन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि लॉटरी प्रणाली न केवल वर्ग विशेष के लिए आरक्षित पदों को निर्धारित करेगी, बल्कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को भी तय करेगी। इससे चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और समावेशी बनेगी। यह पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव भाजपा की भजन लाल सरकार की साख से जुड़ा हुआ है। राज्य में भाजपा के कितने प्रधान, जिला प्रमुख, महापौर बनते है। इस पर प्रदेश भाजपा सरकार की लोकप्रियता का आकलन हो सकेगा। विधानसभा सत्र के बाद पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनावों की गतिविधियां तेज होगी। सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस दोनों इन चुनावों की व्यूह रचना में लगे हुए है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष इस चुनाव की तैयारी के लिए इसी सप्ताह बीकानेर आ रहे हैं।

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