जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): फागुन की रंगत में डूबी संगीतमय संध्या ‘रस रंग बरसे’ ने रविवार को महाराणा प्रताप सभागार को सुरों और उत्साह से भर दिया। कल्चरल सोसायटी ऑफ राजस्थान (रजि.) के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के नामचीन गायकों ने होली और प्रेम के गीतों से श्रोताओं को बांधे रखा। कार्यक्रम से पहले हाई टी के दौरान ही उत्सव का माहौल बन चुका था। संध्या की विशेष प्रस्तुति शंकर गर्ग की रही। उन्होंने मुंह से ही घुंघरू की ध्वनि निकालकर ऐसा समां बांधा कि सभागार तालियों से गूंज उठा। उनकी इस अनोखी शैली ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और कार्यक्रम की यादगार झलक बन गई।
मुकेश पारिक ने ‘भोले ओ भोले’ से शुरुआत की। पिंकी सूरी देवाना ने ‘जारे जा ओ हरजाई’, राजेन्द्र परनामी ने ‘पुकारता चला हूं मैं’ और मनोज ममनानी ने ‘होलियां में उड़े रे गुलाल’ से फागुनी रंग बिखेरे। प्रियंका काला ने ‘पिया तोसे नैना लागे रे’, भारती शर्मा ने ‘जवाँ है मोहब्बत’ और सुमन माथुर ने ‘भोर भई पनघट पे’ को सुरों से सजाया। दीप प्रज्वलन के पश्चात संस्था का परिचय देते हुए महासचिव सुरेश त्रिवेदी ने बताया कि CSR राजस्थान की एकमात्र सांस्कृतिक संस्था है जो पिछले 68 वर्षों से लगातार कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करती रहती है। इस कार्यक्रम की परिकल्पना राजेन्द्र परनामी, संयोजन शंकर गर्ग एवं मंच सञ्चालन गौरव शर्मा का था। दिया माहेश्वरी की ‘छाप तिलक सब छीनी’, सतीश जैन के ‘रंग बरसे भीगे चुनरवाली’, यशवर्धन के ‘चालत मुसाफिर मोह लियो रे’, लक्ष्मण वाधवानी के ‘मेरे पैरों में घुंघरू’, ममता झा के ‘मैंने रंग ली आज चुनरिया’ और शशि परनामी के ‘होली आई रे कन्हाई’ ने माहौल को रंगमय बनाए रखा। संस्था के पदाधिकारी एस.एस. भूतड़ा, एमजेएफ लायन डॉ.एलसी भारतीय और सुरेश त्रिवेदी ने कलाकारों का सम्मान किया। संध्या में शास्त्रीयता, फिल्मी धुनों और लोक-रस का सुंदर संगम देखने को मिला, जिसने फागुन के आगमन को सुरों के साथ खास बना दिया।