आईपीएस अफसरों का शीघ्र ही एक और तबादला बम फूटने वाला है: महेश झालानी

AYUSH ANTIMA
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जयपुर: राजस्थान पुलिस में सोमवार देर रात 21 आईपीएस अधिकारियों के तबादले की सूची जारी हुई। इस सूची ने प्रशासनिक हलकों में हलचल तो मचाई ही, लेकिन उससे ज्यादा बेचैनी उन अधिकारियों में देखी जा रही है, जिनका नाम अभी तक नई पोस्टिंग में शामिल नहीं हुआ है। इस साल 1 जनवरी को राज्य के 42 आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नति दी गई थी लेकिन अब तक उनमें से केवल 21 अधिकारियों को ही नई जिम्मेदारी मिली है। बाकी 21 अधिकारी अभी भी अपने पुराने पदों पर ही कायम है और नई पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। उनकी फाइलें मुख्यमंत्री कार्यालय में अंतिम मंजूरी के लिए लंबित हैं। सबसे ज्यादा चर्चा 2012 और 2013 बैच के उन 23 अधिकारियों की हो रही है, जिन्हें ‘सिलेक्शन स्केल’ में पदोन्नति मिली है। नियम के अनुसार पदोन्नति के बाद उन्हें उच्च स्तर के पदों पर लगाया जाना चाहिए, लेकिन पहली सूची में उनके नाम नहीं आए। इससे संकेत मिलता है कि सरकार जिलों के स्तर पर बड़ा फेरबदल करने की तैयारी में है।
संभावना जताई जा रही है कि इन अनुभवी अधिकारियों को जिलों से हटाकर मुख्यालय की महत्वपूर्ण शाखाओं—जैसे इंटेलिजेंस, क्राइम ब्रांच और एसीबी में लगाया जा सकता है। वहीं, 2017 बैच के वे अधिकारी जो हाल ही में जेएजी ग्रेड में पदोन्नत हुए हैं, उन्हें जिलों की कमान सौंपी जा सकती है। सरकार ऐसे जिलों की भी समीक्षा कर रही है, जहां कानून-व्यवस्था को लेकर शिकायतें या असंतोष रहा है। माना जा रहा है कि आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए सरकार फील्ड में युवा और सक्रिय अधिकारियों को जिम्मेदारी देना चाहती है। पहली सूची में वरिष्ठ स्तर पर समायोजन कर दिया गया है, लेकिन असली बदलाव जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) के स्तर पर होगा। सूत्रों के अनुसार शीघ्र ही दूसरी सूची जारी हो सकती है। इस सूची में शेष पदोन्नत अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिलेंगी और करीब एक दर्जन जिलों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल, पदोन्नत अधिकारी तकनीकी रूप से अपने पुराने पदों पर ही कार्य कर रहे हैं, लेकिन सभी की नजरें अब सरकार की अगली सूची पर टिकी हुई हैं, जो उनके करियर की नई दिशा तय करेगी। पुलिस अफसरों में इस बात को लेकर उत्सुकता है कि जेडीए में किसका पदस्थापन होता है। यह बहुत ही मलाईदार पद है। यहां की कमान कभी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पास रही है तो कभी आईजी के पास। राहुल कोटोकी को थोड़े दिनों बाद ही यहां से चलता कर दिया। सरकार को उनकी जबरदस्त शिकायत मिल रही थी।

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