राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की स्वर्ण जयंती समारोह का आगाज: शल्य चिकित्सा पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला ‘शल्यकोन’ का शुभारंभ

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर द्वारा अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्वर्ण जयंती समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत राष्ट्रीय स्तर की तीन दिवसीय शल्य तंत्र (शल्यकोन) कार्यशाला का शुभारंभ गुरुवार, 5 फरवरी 2026 से किया गया। संस्थान के कुलपति प्रो.संजीव शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि स्वर्ण जयंती समारोह के इस ऐतिहासिक अवसर पर 9 फरवरी 2026, सोमवार को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा तथा केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भारत सरकार प्रताप राव जाधव समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पधारेंगे। इस अवसर पर राज्य के वरिष्ठ अधिकारीगण एवं अन्य विशिष्ट अतिथिगण भी उपस्थित रहेंगे। समारोह के दौरान आमजन के स्वास्थ्य हित में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान द्वारा विकसित विभिन्न आयुर्वेदिक नवाचारों का शुभारंभ किया जाएगा। स्वर्ण जयंती समारोह के अंतर्गत 5 से 7 फरवरी 2026 तक राष्ट्रीय कार्यशाला ‘शल्यकोन’ का आयोजन नेशनल सुश्रुत एसोसिएशन के तत्वावधान में किया जा रहा है। इस कार्यशाला में देशभर से आए आयुर्वेद शल्य चिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रोफसर केके ठकराल, कुलपति प्रोफेसर संजीव शर्मा, प्रोफेसर प्रसन्ना एन रॉव, डॉ.मुकुल पटेल, प्रोफेसर अजय कुमार गुप्ता, शल्य तंत्र विभागाध्यक्ष प्रो.पी. हेमंता, संयुक्त निदेशक जेपी शर्मा ने किया। नेशनल सुश्रुत एसोसिएशन के महासचिव एवं राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के शल्य तंत्र विभागाध्यक्ष प्रो.पी. हेमंता ने बताया कि कार्यशाला में मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रोफसर केके ठकराल एवं पद्मश्री वैद्य मनोरंजन साहू द्वारा पाइल्स, फिस्टुला सहित अन्य आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों पर विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जा रही है। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से 100 से अधिक आयुर्वेद शल्य विशेषज्ञ सहभागिता कर रहे हैं। इसके साथ ही आयुर्वेद एवं शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में कार्यरत देश की विभिन्न कंपनियों द्वारा स्टॉल प्रदर्शनी भी लगाई गई है।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद शल्य चिकित्सकों को वर्तमान समय की बीमारियों के अनुरूप रोग निदान, उपचार एवं आधुनिक तकनीकों की जानकारी प्रदान कर उनकी व्यावहारिक दक्षता को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान का स्वर्ण जयंती समारोह आयुर्वेद के क्षेत्र में नवाचार, अनुसंधान एवं जनस्वास्थ्य को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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