युवा पीढी को सनातन का संवाहक बनना होगा

AYUSH ANTIMA
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यह एक शास्वत सत्य है कि किसी भी राष्ट्र व समाज की रीढ़ उसकी युवा पीढ़ी होती है। सनातन धर्म के संरक्षण के लिए युवा पीढ़ी को प्राचीन मूल्यों, संस्कृति और परम्पराओं से जोड़ना बहुत जरुरी है। इसके लिए रामायण-महाभारत, योग-ध्यान, दैनिक पूजा वैज्ञानिक सोच और हमारे महापुरुषों के जीवन के माध्यम से संस्कारित करना होगा ताकि वे अपनी जड़ो पर गर्व कर सकें व सनातन संस्कृति के संवाहक बन सके। युवा वर्ग को स्वाभिमानी बनाने के साथ ही सेवा, करूणा, सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने हेतु प्रेरित करें। भारतीय संस्कृति और सनातन के संरक्षण की आज सबसे बड़ी आवश्यकता है। मनुष्य योनी बड़ी दुर्लभता से मिलती है, इसका सदुपयोग करते हुए समाज व राष्ट्र की सेवा करनी चाहिए। युवा शक्ति को नकारात्मक प्रभाव से बचना होगा। विदित हो सनातनियों ने धर्म, संस्कृति व राष्ट्र की रक्षार्थ समय समय पर प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया है। युवा पीढ़ी खासकर मातृशक्ति को विधर्मियों के मंसूबों को समझना होगा। समाज व राष्ट्र के निर्माण में नारी शक्ति का भी विशेष योगदान रहता है।‌ देखा जाए तो किसी भी बच्चे की मां उसकी पहली गुरू होती है, जो बच्चे में संस्कारों का बीजारोपण करती है। मातृशक्ति को चाहिए कि बच्चों को पश्चिमी संस्कृति से दूर रहने की प्रेरणा दे। जाति, भाषा व पंथ से उपर उठकर हम सनातनी है, केवल यही लक्ष्य होना चाहिए। कुछ राजनीतिक दल सनातन समाज को जातियों में बांटने का षड़यंत्र रच रहे हैं, वास्तव में ये दल सनातन के घोर विरोधी है। इन सफेदपोशों के मंसूबों को समझना होगा व जातिवाद से उपर उठकर अर्जुन की तरह एक ही लक्ष्य होना चाहिए कि हम सनातनी है। लव जिहाद के अनेक मामले प्रकाश में आ रहे हैं। इसको लेकर मातृशक्ति का पहला कर्तव्य होना चाहिए कि ऐसे मामलो से अपनी बेटियों में ऐसे संस्कार डाले कि वह ऐसे मामलों से दूर रह सके। देश में सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण के मामले प्रकाश में आ रहे हैं, जो सनातन की नींव कमजोर करने की कथित साजिश है। युवा शक्ति को ऐसी कथित साजिशों को नाकाम करने आगे आना होगा। सनातन धर्म की अमूल्य धरोहर गौमाता आज दयनीय स्थिति में है इसके लिए हमारा सभ्य समाज भी जिम्मेदार है कि जब तक दुध देती है, उसको रखा जाता है फिर उसके नदी को व बूढ़ी हो जाने पर गौवंश को सड़कों पर कूड़ा करकट खाने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसको लेकर गंभीरता से सोचना होगा व गौशालाओं के प्रबंधकों को इन बेसहारा गौवंश को आसियाना देने की पहल करनी होगी। जिस तरह से हमारी युवा पीढ़ी सोशल मीडिया पर अश्लील रील की और आकर्षित हो रही है, यह हमारे सनातन समाज के लिए शुभ संकेत नहीं है। परिवारिक पवित्र रिश्तों को लेकर भौडी कामेडी व अश्लील रील बनाकर सोशल मीडिया पर परोसी जा रही है। साहित्य किसी भी समाज का दर्पण होता है अतः हमारी युवा पीढ़ी को अच्छे साहित्य को पढ़ने के लिए प्रेरित करने की ज़रूरत है। अब समय की मांग है कि हम अपने यूवाओ व नौनिहालों को सनातन की मुख्य किन्तु छोटी छोटी आदतों से रुबरू करवाए। यही संस्कार और श्रेष्ठ व्यक्ति के निर्माण में सहायक होगी, जब युवा पीढ़ी सक्षम और समर्थ बनेगी तो उनका मनोबल बढ़ेगा व स्वस्थ जीवनशैली की परम्परा पुनः विकसित और स्थापित होगी ।

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