प्रवाह–2026 के अंतर्गत आरंभ MUN 2.0 में गूंजे तार्किक विमर्श के स्वर

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): स्वामी केशवानंद इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट एंड ग्रामोत्थान (एसकेआईटी), जयपुर में आयोजित वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव प्रवाह–2026 के अंतर्गत आरंभ MUN 2.0 का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम ने युवाओं को राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर, तार्किक और प्रभावशाली संवाद का मंच प्रदान किया। इस वर्ष की प्रमुख समिति AIPPM (All India Political Parties Meet) रही, जिसका विषय था -“केंद्रीय जांच एजेंसियां: न्याय की प्रहरी या राजनीतिक हथियार”। विषय ने छात्रों को समसामयिक राजनीति और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गहन चिंतन का अवसर दिया। विभिन्न कॉलेजों से आए प्रतिनिधियों ने अलग-अलग राजनीतिक दलों का प्रतिनिधित्व करते हुए तथ्यपूर्ण तर्क, संवैधानिक संदर्भ और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। सत्र की शुरुआत औपचारिक उद्घाटन के साथ हुई, जिसके बाद प्रतिनिधियों ने अपने-अपने एजेंडा पर भाषण दिए। बहस के दौरान सत्ता और विपक्ष की भूमिका, जांच एजेंसियों की निष्पक्षता, संघीय ढांचे की मजबूती तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों पर गंभीर और प्रभावशाली चर्चा हुई। सदन में प्वाइंट ऑफ इन्फॉर्मेशन और प्रतिवादों ने वातावरण को जीवंत बनाए रखा। प्रतिभागियों ने अपने वक्तृत्व कौशल, शोध-आधारित प्रस्तुति और कूटनीतिक व्यवहार से निर्णायक मंडल को प्रभावित किया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिनिधियों को बेस्ट डेलीगेट, हाई कमेंडेशन और स्पेशल मेंशन जैसे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन कॉऑर्डिनेटर डॉ.निधि शर्मा के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। आयोजन की रूपरेखा और अनुशासन बनाए रखने में मॉडरेटर अविरल अग्रवाल और को-मॉडरेटर जसप्रीत और विकास का विशेष योगदान रहा। आयोजन समिति एवं स्वयंसेवकों ने भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सका। आरंभ MUN 2.0 ने न केवल छात्रों की संवाद क्षमता और नेतृत्व कौशल को निखारा, बल्कि उन्हें लोकतांत्रिक मूल्यों, आलोचनात्मक सोच और जिम्मेदार नागरिकता के प्रति भी जागरूक किया। यह आयोजन प्रवाह–2026 की बौद्धिक गरिमा को और अधिक सुदृढ़ करने में सफल रहा। अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों, निर्णायकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आरंभ MUN 2.0 ने यह सिद्ध कर दिया कि युवा केवल दर्शक नहीं, बल्कि राष्ट्र के विचारशील निर्माता हैं।

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