झुंझुनू (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): चिकित्सा विभाग ने जन साधारण को शीत/शीतलहर से बचाव के लिए एडवायजरी जारी करते हुए बचाव के उपाय अपनाने की अपील की है। सीएमएचओ डॉ.छोटेलाल गुर्जर ने बताया कि शीतलहर से प्रभावित रोगियों के लक्षण में शरीर का ठण्डा पड़ जाना, शरीर का सुन्न पड़ना, नाड़ी का धीमा व मन्द पड़ जाना, रोये खड़े हो जाना व श्वसन तेज चलना आदि होते है। ऐसे रोगी द्वारा समय पर उपचार नहीं लेने पर रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।
*बचाव के उपाय*
* जहां तक हो सके घर के बाहर कार्य हेतु दिन में निकले।
* स्वयं को व बच्चों को उपलब्ध ऊनी कपड़ों से ढके।
* फुटपाथ पर रहने वाले भ्रमणशील जातियां, जैसे भिखारी, गाड़िया लुहार आदि रात्रि में रेन बसेरा, सार्वजनिक भवन, धर्मशालाओं में रहें, खुले स्थान पर न सोयें।
* रात्रि में बाहर कार्य करना/रहना आवश्यक हो तो अपने पास अंगीठी, आवश्यक लकड़ी व कूड़ा करकट जलाकर अलाव लगाकर तापने की व्यवस्था करें।
* शीतलहर में अधिकतर गर्म भोजन का सेवन करें और खाद्य पदार्थ जैसे गुड़, तिल, चिकनाई, चाय, कॉफी आदि का सेवन करें।
* शारीरिक श्रम अधिक करें, हो सके तो सुबह व्यायाम करें, तेल की मालिश करें।
* जिस व्यक्ति को शीत/शीतलहर का प्रभाव पड़ जाये उसे तत्काल कम्बल, रजाई आदि से ढकें।
* पास में अंगीठी, हीटर आदि जलाये, कमरे में ताजा हवा का रास्ता बन्द न करें।
* गर्म पेय पदार्थ गुड़, चाय, चिकनाई (घी), कॉफी, तेल का अधिक उपयोग करें।
* गर्म पानी की थैली उपलब्ध हो तो उससे सेक करें, बाद में पास के चिकित्सालय में दिखाये, जहां तक हो सके गर्म पानी से नहाये।
शीत/शीतलहर से प्रभावित होने पर व्यक्ति को शीघ्र ही नजदीकी चिकित्सा संस्थान में उपचार हेतु ले जायें/ले जाने की सलाह देंवे।