बसंत नूतनता के आविर्भाव का प्रतीक: संतोष सागर

AYUSH ANTIMA
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वाराणसी (तोलाराम मारु): हरिनारायण-शिवशंकर राठी- पांचू (राजस्थान) के परिवारजनों द्वारा काशी के मुमुक्षु भवन में आयोजित शिव महापुराण कथा के तृतीय दिवस की कथा करते हुए युवा संत संतोष सागरजी महाराज ने कहा कि प्रत्येक नारी में माँ भगवती का अंश है, इसी ज्ञान से भारतीय लोक में सदैव से नारी का सम्मान रहा है। नारी को अपमानित तथा क्षुब्ध करने से प्रकृति क्रूद्ध होती है। पौराणिक राजा दक्ष की कथा सुनाते हुए आपने कहा, भले ही सती दक्ष की सुपुत्री थी, परन्तु उसका अपमान करने पर उसे सर्वनाश का सामना करना पड़ा। आपने बसंत पंचमी के दिन कथा करते हुए कहा कि ऋतुराज बसंत के दिन हम भगवती के पांच स्वरूप राधा, पद्‌मा, सावित्री, दुर्गा और सरस्वती के समग्र रूपों का पूजन करते हैं। बसंत नूतनता के आविर्भाव को उपस्थित करता है। बसंत काल में हरेक व्यक्ति एक नई उमंग महसूस करता है। उन्होंने काशी के सम्बन्ध में कहा कि यह ज्ञान भूमि है, यहां सदैव सरस्वती का वास रहा है। कथा यजमान परिवार के हरिनारायण जी राठी ने साफा पहनाकर तथा शॉल ओढाकर महाराज श्री का सम्मान किया। इस अवसर पर जगदीश बजाज, बजरंग लाल लखोटिया, भंवरलाल बाहेती बाबूलाल तोसनीवाल, लालचंद बाहेती तथा शिवरतन राठी ने भी महाराजश्री का माला पहनाकर अभिनंदन किया।
कथा के उपरांत बसंत पंचमी के अवसर पर लोक संगीत का कार्यक्रम रखा गया। कथा का मंच संचालन साहित्यकार डॉ.चेतन स्वामी ने किया। गो सेवक रामकिशन राठी, पांचू ने बड़े मन से होली की धमाल गाकर होली त्यौहार के पदार्पण का संकेत किया। सायंकाल को लोगों ने काशी के विभिन्न घाटों का भ्रमण किया तथा महादेव काशी विश्वनाथ के दर्शन किए।

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