बीकानेर। जिला कलेक्टर नम्रता वृष्णि की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में मानव–वन्यजीव संघर्ष पर जिले की पहली कार्यशाला आयोजित हुई। बैठक में वन्यजीव संरक्षण और त्वरित रेस्क्यू व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कार्यशाला में बताया गया कि जोड़बीड़ गिद्ध संरक्षण क्षेत्र में गिद्धों को आवारा कुत्तों से बचाने के लिए बीकानेर विकास प्राधिकरण द्वारा डिच फेंसिंग (खाई व बाड़) कराई जाएगी। वहीं, घायल वन्यजीव या शिकार की किसी भी घटना पर वाइल्ड लाइफ कंट्रोल रूम 0151-2527901 पर तुरंत सूचना देने और इस नंबर के व्यापक प्रचार के निर्देश दिए गए।
जिला कलेक्टर ने वन विभाग को निर्देश दिए कि एनजीओ, गौशालाओं और पशुपालन विभाग के सहयोग से जिले भर में स्थानीय स्तर पर रेस्क्यू वार्ड विकसित किए जाएं, ताकि घायल पशुओं का समय पर उपचार हो सके। साथ ही, जिला मुख्यालय पर प्रस्तावित रेस्क्यू सेंटर के लिए नगर निगम द्वारा 5 हैक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने पर सहमति जताई गई।
बैठक में करंट या कंटीली बाड़ के स्थान पर बायो फेंसिंग (कैक्टस आदि) को बढ़ावा देने, गौरेया संरक्षण पर ध्यान देने और बंदरों के हमलों की स्थिति में त्वरित कार्रवाई हेतु नगर निगम से निविदा प्रक्रिया कराने पर भी चर्चा हुई।
कार्यशाला में वन विभाग, पशुपालन, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, उद्योग विभाग, राजूवास तथा सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।