प्रकृति के दुश्मनों ने धामेडा धाम में 50 वर्ष पुराना नीम का पेड़ काटा, पर्यावरण को हुआ नुकसान, आमजन में भारी आक्रोश

AYUSH ANTIMA
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नारायणपुर: उपखण्ड के प्राचीन अरावली पर्वतमाला की तलहटी में बसे खेड़ापति बाबा पीर संज्यानाथजी महाराज की तपोस्थली धामेड़ा धाम में खारिया की ढाणी की ओर जाने वाले मुख्य सड़क किनारे पर चारागाह, गौचर भूमि में स्थित लगभग 50 वर्ष पुराने नीम के पेड़ को प्रकृति के दुश्मनों ने काटकर बेच दिया गया। गौचर सरकारी जमीन के हरे पेड़ों को काटकर बेचना अत्यंत निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण कार्य है। यह नीम का पेड़ लगभग 50 वर्ष पुराना था, इसी पेड़ के कारण धामेडा़ धाम में जाने वाले इस रास्ते को निमड़ी वाला रास्ता के नाम से जाना जाता था। कोरोना काल में इसी पेड़ के पास पीर शिवनाथ महाराज के द्वारा गिलोय की बेल लगाई गई थी ताकि लोग नीम गिलोय का काड़ा लेकर विभिन्न बीमारियों में उपयोग कर सके। प्रकृति के दुश्मनों ने केवल पेड़ को ही नहीं काटा बल्कि खेड़ापति बाबा पीर संज्यानाथजी महाराज की आस्था, भक्ति, श्रद्धा और विश्वास के साथ भी आघात किया है। जिन्होंने रास्ते का नीम काटकर नीमडी वाला रास्ते का नाम मिटाने की कोशिश की है, जिसको लेकर आमजन में आक्रोश है। वही ग्रामीणों का कहना है कि चारागाह और गौचर भूमि पर केवल गायों, गौशालाओं व सरकार का अधिकार है। आखिर किसकी शह पर इस पेड़ को काटा गया है। प्रशासनिक अधिकारियों पर भी यह प्रश्न चिन्ह लगता है कि आखिर गौचर एवं सरकारी भूमि पर कोई भी पेड़ पौधे काटकर बेच देता है, जिसके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की जाती। इससे साफ जाहिर होता है कि केंद्र सरकार के एक पेड़ मां के नाम अभियान की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। पेड़ लगाना ही पर्याप्त नहीं, पुराने पेड़ पौधों की रक्षा करना एवं प्रकृति का संरक्षण करना भी बड़ी बात है। आखिर कब खुलेगी प्रशासनिक अधिकारियों की आंखें। कब होगी अवैध कटाई पर रोक। कौन होगा इसका संरक्षक आदि बातों पर प्रश्न चिन्ह लगता हुआ दिखाई देता है। क्या आगामी चुनाव में भी झूठे वादे करके वोट बटोरे जाएगे या वास्तविक रूप से धरातल पर अवैध कटाई करने वाले लोगों पर शिकंजा कसा जाएगा। यह अभी भविष्य के गर्भ में है। पूर्व में भी वन विभाग घाटा रेंज के द्वारा अवैध रूप से हरे पेड़ों की कटाई करने वाली महिलाओं पर कार्यवाही की गई थी लेकिन वर्तमान में समस्या जस की तस बनी हुई है।

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