सर्दी बढ़ने पर छुट्टी घोषित करने के शिक्षा विभाग व कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखा रहे निजी स्कूल संचालक: संयुक्त अभिभावक संघ

AYUSH ANTIMA
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जयपुर: प्रदेश में शीतलहर और अत्यधिक सर्दी को देखते हुए जिला कलेक्टर एवं शिक्षा विभाग द्वारा सोमवार को बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सरकारी और निजी विद्यालयों में अवकाश घोषित किया था किंतु अधिकतर निजी स्कूल संचालकों ने इन आदेशों को खुलेआम ठेंगा दिखाते हुए मनमाना रवैया अपनाया और जबर्दस्ती बच्चों को भारी ठंड और कोहरे के बीच स्कूल आने पर मजबूर किया। यह न केवल प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना है, बल्कि नन्हे बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़ भी है। संयुक्त अभिभावक संघ ने निजी स्कूल के इस तानाशाही रवैये की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि सरकारी आदेशों के बावजूद स्कूलों को खुला रखना, बच्चों को ठंड में स्कूल आने के लिए मजबूर करना पूरी तरह असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदाराना कृत्य है। कई स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है कि बच्चे अवकाश के बावजूद स्कूल आएँ, जो पूरी तरह अनुचित है। संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा — “यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि निजी स्कूल संचालक स्वयं को कानून से ऊपर समझने लगे हैं। जिला कलेक्टर और शिक्षा विभाग के आदेश कोई सुझाव नहीं बल्कि बाध्यकारी निर्देश हैं, जो स्कूल इन आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं, उनके विरुद्ध तत्काल सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा कि छोटे बच्चों, विशेषकर नर्सरी से पांचवीं कक्षाओं के विद्यार्थियों को ठंड में स्कूल बुलाना अमानवीय है। यदि किसी बच्चे के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचता है तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित स्कूल प्रशासन की होगी।

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