जयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ में संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। यह याचिका मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी), जयपुर जैसे शैक्षणिक परिसरों में ट्रेड फेयर/एक्सपो/प्रदर्शनी जैसे व्यावसायिक आयोजनों के खिलाफ दायर की गई है। मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा एवं न्यायमूर्ति श्रीमती संगीता शर्मा की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों की ओर से जवाब प्रस्तुत करने हेतु समय मांगा गया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 को निर्धारित की है। संयुक्त अभिभावक संघ का स्पष्ट कहना है कि शैक्षणिक संस्थान शिक्षा का मंदिर होते हैं न कि व्यापारिक गतिविधियों का केंद्र। एमएनआईटी जैसे प्रतिष्ठित एवं सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के परिसरों में व्यावसायिक मेलों का आयोजन न केवल शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित करता है, बल्कि छात्र–छात्राओं की सुरक्षा, अनुशासन और शैक्षणिक गरिमा पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि “संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत विद्यार्थियों को सुरक्षित, शांत और शुद्ध शैक्षणिक वातावरण का अधिकार है। शिक्षा परिसरों को कमाई का साधन बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है। संघ इस मुद्दे पर अंत तक संघर्ष करेगा।” संघ ने आशा व्यक्त की कि न्यायालय इस गंभीर विषय पर सख्त दिशा-निर्देश जारी करेगा, ताकि भविष्य में किसी भी शैक्षणिक संस्थान में इस प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियाँ न हो सकें और विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
*11 निजी संस्कृत कॉलेजों के विद्यार्थियों का भविष्य बचाने के लिए संयुक्त अभिभावक संघ सोमवार को राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय कुलसचिव को देगा ज्ञापन*
संयुक्त अभिभावक संघ प्रदेश अध्यक्ष अरविंद अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि शुक्रवार को राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय कुलसचिव ने गैर जिम्मेदाराना व्यवहार का प्रदर्शन करते हुए 11 निजी संस्कृत कॉलेज पर जुर्माना ना भरने की स्थिति में विद्यार्थियों को परीक्षा वंचित करने का फरमान जारी किया है, जिसका संयुक्त अभिभावक संघ कड़े शब्दों में निंदा करता है और मांग करता है कि कार्यवाही जब निजी कॉलेजों पर होनी है तो विद्यार्थियों को क्यों सजा दी जा रही है अगर 11 निजी संस्कृत कॉलेज राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के आदेश की पालना नहीं कर रहे है तो सजा उन कॉलेज संचालकों को विद्यार्थियों को नहीं, प्रशासन का दायित्व विद्यार्थियों का भविष्य संवारने का होता है, बिगाड़ने का नहीं। इसी के संदर्भ में सोमवार को राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव से मिलने का प्रयास किया जाएगा और संघ की तरफ से ज्ञापन सौंपा जाएगा।