इंडियन कैमल रिसर्च सेंटर – ऊँटों पर अनोखा अनुसंधान

AYUSH ANTIMA
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भारत की मरुभूमि का गौरव—ऊँट—के संरक्षण, प्रजनन और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए बीकानेर में स्थापित इंडियन कैमल रिसर्च सेंटर (ICAR–National Research Centre on Camel) दुनिया का एकमात्र संपूर्ण ऊँट अनुसंधान केंद्र है। यह न सिर्फ ऊँटों के विकास पर काम करता है, बल्कि रेगिस्तानी जीवन में ऊँट की बदलती उपयोगिता, आर्थिक महत्व और स्वास्थ्य संबंधी शोध में भी अग्रणी भूमिका निभाता है।
स्थापना और उद्देश्य
इंडियन कैमल रिसर्च सेंटर की स्थापना वर्ष 1984 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने की थी। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य था—
ऊँटों की संरक्षा और नस्ल सुधार
प्रजनन एवं वैज्ञानिक प्रबंधन
ऊँटों में होने वाले रोगों का उपचार व रोकथाम
ऊँट के दूध, मांस और ऊन के उपयोगों पर शोध
ऊँटपालकों की आजीविका में वृद्धि
मरुस्थल की कठोर परिस्थितियों में ऊँट ही वह पशु है जो इंसान का साथी बनकर सदियों से जीवन के संघर्षों को आसान करता आया है। इसलिए इसका संरक्षण समय की माँग बन गया।
ऊँट की प्रमुख नस्लें और सेंटर का योगदान
बीकानेर स्थित यह केंद्र राजस्थान की तीन प्रमुख नस्लों पर शोध करता है—
बीकानेरी नस्ल – अपनी सहनशक्ति के लिए प्रसिद्ध
जैसलमेरी नस्ल – तेज चाल और लंबी दूरी तय करने वाली
कच्छी नस्ल – दूध देने की क्षमता में श्रेष्ठ
केंद्र ने वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से नस्लों को संरक्षित कर उनकी जनसंख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
ऊँट के दूध पर अनुसंधान
ऊँट का दूध अपनी औषधीय विशेषताओं के कारण अब “सुपरफूड” के रूप में उभर रहा है। केंद्र में हुए शोध बताते हैं कि—
यह मधुमेह (Diabetes) के रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी है
इसमें इंसुलिन-जैसे प्रोटीन पाए जाते हैं
यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
इसमें वसा (Fat) कम और विटामिन–C अधिक होता है
आज केंद्र द्वारा उत्पादित कैमल मिल्क, आइसक्रीम और अन्य दुग्ध उत्पाद देशभर में लोकप्रिय हो रहे हैं।
ऊँटों के स्वास्थ्य पर शोध
केंद्र में विशेषज्ञ डॉक्टर और वैज्ञानिक ऊँटों में होने वाले रोगों का अध्ययन करते हैं।
ऊँटों के टीके (Vaccination)
परजीवी नियंत्रण
प्रजनन संबंधी समस्याएँ
बीमारियों की रोकथाम
इन विषयों पर महत्वपूर्ण शोध कर ऊँटपालकों को मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।
ऊँट की बदलती उपयोगिता
एक समय था जब ऊँट मरुस्थल का ‘शिप ऑफ द डेज़र्ट’ कहलाता था और परिवहन का प्रमुख साधन था। तकनीक और यातायात के बढ़ने से इसकी उपयोगिता में कमी आई, लेकिन केंद्र ने ऊँट को नई भूमिकाओं में स्थापित किया—
ऊँट सफारी और पर्यटन
ऊँट मिल्क उत्पाद
ऊँट ऊन से बने वस्त्र
फार्मिंग और कृषि कार्यों में मदद
इससे ऊँटपालकों को नई आर्थिक दिशा मिली है।
कैमल फेस्टिवल और जागरूकता
हर वर्ष होने वाला बीकानेर ऊँट महोत्सव केंद्र के सहयोग से आयोजित किया जाता है, जिसमें ऊँटों की साज-सज्जा, नृत्य, दौड़, और सांस्कृतिक कार्यक्रम पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
यह उत्सव न केवल पर्यटन को बढ़ावा देता है बल्कि ऊँटों के संरक्षण का संदेश भी देता है।
निष्कर्ष
इंडियन कैमल रिसर्च सेंटर, बीकानेर न केवल राजस्थान बल्कि भारत की रेगिस्तानी संस्कृति और जैव–विविधता की धरोहर को सुरक्षित रखने का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
यहाँ हो रहे अनुसंधान ऊँटों के भविष्य, ऊँटपालकों की आजीविका और मरुस्थलीय जीवन—तीनों की बेहतरी में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
ऊँट केवल एक पशु नहीं, बल्कि मरुस्थल की आत्मा है—
और यह केंद्र उस आत्मा को जीवित रखने का अनमोल प्रयास कर रहा है।

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