विधायक अनीता भदेल का कहीं नया सरदर्द न बन जाए गुलाब बाड़ी और सुभाष नगर का ओवर ब्रिज

AYUSH ANTIMA
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अजमेर के गुलाबबाड़ी–मदार क्षेत्र के रेलवे ओवरब्रिज को लेकर जिस तरह फाटक बंद कर दिए गए हैं और जनता को “वैकल्पिक मार्ग” नाम की मजबूरी थमा दी गई है, वह आने वाले दिनों की सबसे भयावह ट्रैफिक कहानी बनने जा रही है। प्रशासन मानकर चल रहा है कि लोग किसी भी हालत में रास्ता निकाल ही लेंगे लेकिन हक़ीक़त यह है कि बनाए गए ये तंग, अनियोजित और अव्यवस्थित वैकल्पिक रास्ते दुर्घटनाओं के सबसे बड़े केन्द्र बनकर फटने वाले हैं। यह कोई विकास नहीं, बल्कि काग़ज़ी इंजीनियरिंग की नंगी हठधर्मिता है, जहाँ सड़क की चौड़ाई, मोड़ की सुरक्षा, दोपहिया–चौपहिया का दबाव, रात की दृश्यता और निकासी का प्रबंधन, सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। अभी सिर्फ शुरुआत है और हालात बता रहे हैं कि ट्रैफिक का यह बोझ इन गलियों को बिखेरने वाला है। आने वाले हफ्तों में यह इलाका सिर्फ जाम से नहीं, हर दूसरे दिन किसी नए हादसे से पहचाना जाएगा और बात यहीं ख़त्म नहीं होती। यह पूरा क्षेत्र विधायक अनीता भदेल के निर्वाचन क्षेत्र में आता है, जहाँ जनता सीधे तौर पर इस “निर्णय” का भार झेल रही है। यह निर्माण जितना ज़रूरी है, उतना ही बेतरतीबी से लागू किया गया है। न समय का ख्याल, न मार्ग का आकलन, न जनता की परेशानी का अनुमान, आज नहीं तो कल, यह मुद्दा सीधा उनकी राजनीतिक अस्मिता को चुनौती देने वाला है। जनता पूछ रही है कि क्या विकास का मतलब रास्ते बंद कर देना और लोगों को अंधे मोड़ों व ख़तरे भरे रास्तों में धकेल देना है, क्या इसका हल यही था कि पूरे क्षेत्र को फ़िलहाल छह महीनों तक अराजकता की भट्टी में झोंक दिया जाये, क्या यह सोच लिया गया है कि “मार्च 2026 तक सब ठीक हो जाएगा”, तब तक होने वाली जान–माल की हानि का कोई हिसाब नहीं रखा जाएगा। वास्तविकता बहुत साफ़ है, यह ओवरब्रिज बनकर ज़रूर खड़ा होगा। रेल भी पटरियों पर दौड़ती रहेंगी लेकिन इसके बनने से पहले हज़ारों लोगों का रोज़ का जीवन पटरी से उतरने वाला है और यह तयशुदा है कि जैसे-जैसे हालात बिगड़ेंगे, यह जनता की नाराज़गी सीधे उस दरवाज़े पर दस्तक देगी, जहाँ से उम्मीदें थीं कि जनता को राहत मिलेगी यानी विधायक जी की चौखट पर। यदि अभी भी ट्रैफिक सुरक्षा, चौड़ाई सुधार, सिग्नलिंग, निगरानी और वैकल्पिक मार्गों के तात्कालिक उन्नयन पर कठोर और तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में यह निर्णय सिर्फ एक ओवरब्रिज का नहीं… एक जनप्रतिनिधि की विश्वसनीयता का परीक्षण बन जाएगा। यहां लगे हाथ बता दूँ कि यदि अजमेर का पूरा ट्रैफिक विभाग लगकर भी यहां के आवागमन को सुचारू कर दे तो काफ़ी होगा। धार्मिक स्थल हो, बाज़ार हो या आवासीय बस्तियाँ, अजमेर का यह इलाका आने वाले महीनों में चीख–चीखकर पूछेगा कि विकास की जिस कीमत को जनता चुका रही है, क्या उसे कोई सुन भी रहा है।

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