सरकार के भीतर से लेकर भाजपा संगठन तक, हर स्तर पर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर भजन लाल शर्मा मंत्रिमंडल में परिवर्तन कब करेंगे। पहले यह अनुमान था कि सरकार की दो वर्ष की अवधि पूरी होने से ठीक पहले यानी 15 दिसम्बर तक कई मंत्री बदल दिए जाएंगे पर अब तस्वीर साफ है कि 15 दिसम्बर को सरकार अपना दो साल का कार्यकाल पूरा करेगी और इसी व्यस्तता, रिपोर्ट–कार्ड तैयारी और कार्यक्रमों के कारण फेरबदल को आगे खिसका दिया गया है। इसके बाद मल-मास शुरू हो जाएगा, जिसके दौरान परंपरागत रूप से बड़े राजनीतिक निर्णय टाल दिए जाते हैं। यही कारण है कि अब पूरा सियासी गलियारा 14 जनवरी को मल-मास समाप्त होने का इंतजार कर रहा है क्योंकि उसके बाद ही मंत्रिमंडल का पुनर्गठन पहला बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि देरी की असली वजह सिर्फ कार्यक्रमों का दबाव नहीं है, बल्कि सरकार और संगठन दोनों की ओर से मंत्रियों के प्रदर्शन का बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। कई विभागों को लेकर असंतोष लंबे समय से मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व तक पहुंच रहा है। इन विभागों की फाइलों, पिछली समीक्षाओं और जनप्रतिनिधियों के फीडबैक के आधार पर यह लगभग तय माना जा रहा है कि कुछ मंत्रियों की छुट्टी तय है। सरकार उन चेहरों को आगे लाना चाहती है, जो ज़मीन पर सक्रिय, संगठन से जुड़ाव रखने वाले और राजनीतिक संदेश देने की क्षमता रखते हों। दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व के साथ पिछले दिनों हुई चर्चाओं ने भी संकेत दिए हैं कि राजस्थान में एक सख्त और असरदार पुनर्गठन की जरूरत महसूस की जा रही है। भाजपा राज्य नेतृत्व पर यह दबाव भी है कि 2028 के विधानसभा चुनाव में आधे कार्यकाल के बाद सरकार की छवि को ताजा और दमदार बनाया जाए। यही कारण है कि इस बार फेरबदल महज विभागीय अदला-बदली नहीं होगा, बल्कि चेहरे भी बदले जा सकते हैं। उधर, जिन मंत्रियों की परफॉर्मेंस कमजोर मानी जा रही है, उनके विभागों से संबंधित रिपोर्टें लगातार हाईकमान तक पहुंच रही हैं। कहा जा रहा है कि कुछ मंत्री न तो प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित काम कर पाए और न ही राजनीतिक रूप से प्रभावशाली उपस्थिति बना सके। भाजपा की रणनीति नए चेहरों को मौका देकर सरकार की ऊर्जा बढ़ाने की है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच 14 जनवरी वह तारीख बनकर उभरी है, जब मल-मास समाप्त होगा और राजनीतिक निर्णयों के लिए “शुभ समय” माना जाएगा। उसके तुरंत बाद भजन लाल शर्मा सरकार से बड़े फैसले की उम्मीद की जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि जैसे ही मल-मास खत्म होगा, सरकार एक झटके में कई बड़े बदलाव कर देगी, जिसमें हटाए जाने वालों की संख्या भी कम नहीं होगी। इस तरह, राजस्थान की राजनीति इस समय एक “साइलेंट स्टॉर्म” के इंतजार में है, जहां बाहर भले ही सब सामान्य दिख रहा हो लेकिन अंदर बड़े बदलावों की फाइलें लगभग तैयार हैं। सत्ता और संगठन के बीच संवाद तेज है, समीकरणों पर मंथन जारी है और मंत्रियों में बेचैनी बढ़ चुकी है। सभी की निगाह अब 14 जनवरी के बाद भजन लाल शर्मा की अगली चाल पर टिकी है, जो राजस्थान की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।
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