मनरेगा से गांधी का नाम हटाना दूसरी राजनीतिक हत्या: टीकाराम जूली*

AYUSH ANTIMA
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अलवर: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि भगवान के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले भाजपा नेता केवल राजनीतिक स्टंट कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नरेगा से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाना उनकी दूसरी राजनीतिक हत्या के समान है। जूली ने कहा कि भगवान श्रीराम के नाम पर राजनीति करने वालों को उनसे सीख लेनी चाहिए। भगवान राम ने तो शबरी के झूठे बेर खाए थे, जबकि आज भाजपा नेता यूपीए सरकार के कानून को कमजोर कर गरीबों के निवाले पर डाका डालने का काम कर रहे हैं। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सोमवार को अलवर के मिनी सचिवालय गेट के बाहर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से मनरेगा का नाम परिवर्तन एवं उसमें संशोधन के विरोध में आयोजित धरना-प्रदर्शन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश और ताकत भरते हुए कहा कि हठधर्मी सरकार केवल मनरेगा का नाम ही नहीं बदल रही, बल्कि गरीबों के अधिकार छीनने की साजिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व.डॉ.मनमोहन सिंह के नेतृत्व में, कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गांधी की पहल से मनरेगा जैसा विश्व का पहला रोजगार गारंटी कानून बना, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हुई। कांग्रेस शासनकाल में नरेगा के माध्यम से जरूरतमंदों को रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया गया और देशभर में ऐतिहासिक विकास कार्य हुए। इसके विपरीत वर्तमान सरकार काम के अधिकार के कानून का गला घोंटने का कार्य कर रही है।

*पंचायतीराज को किया जा रहा है खोखला*

केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए जूली ने कहा कि निकाय चुनावों को रोककर पंचायतीराज व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है। जिन ग्राम पंचायतों के विकास की जिम्मेदारी स्थानीय सरपंचों की होती थी, अब वही योजनाएं दिल्ली में बैठे भाजपा के नुमाइंदे तय करेंगे।

*खनन माफियाओं को देंगे मुंहतोड़ जवाब*

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि देश और प्रदेश की अरावली पर्वतमालाओं को छलनी करने वाले खनन माफियाओं को किसी भी सूरत में पनपने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका खामियाजा पूरी भाजपा सरकार को भुगतना पड़ेगा। अरावली का मुद्दा अब केवल कांग्रेस का नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का जन आंदोलन बन चुका है। उन्होंने कहा कि लोक देवता महाराजा भर्तृहरि और हनुमान मंदिर के अस्तित्व को खतरे में डालने वालों को यह कानून वापस लेना ही पड़ेगा। अरावली की संपदा को उद्योगपति मित्रों को सौंपने की साजिश कभी सफल नहीं होगी। धरना-प्रदर्शन की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई, जबकि “महात्मा गांधी अमर रहे” के नारों के साथ प्रदर्शन का समापन हुआ।
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