राजस्थान में पेपर लीक प्रकरण व नाथी का बाड़ा कोचिंग संस्थान, जहां से केवल प्रशासनिक अधिकारी ही निकलते थे बहुत चर्चित रहे। पेपर लीक प्रकरण ने उन बेरोजगार युवाओं के सपनों को तहस नहस करने का काम किया, जिन्होंने लाखों रूपये खर्च करने के पश्चात ईमानदारी से परीक्षा दी थी। कांग्रेस शासन मे राजस्थान लोक सेवा आयोग उस सेवा के लिए विख्यात हो गया, जहां कथित सेवा के एवज में आयोग का सदस्य मनोनीत किया जाता था। पेपर लीक प्रकरण में निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा ने ईडी के समक्ष सनसनीखेज सच्चाई बयान की है कि एक करोड़ बीस लाख की कथित सेवा देने के पश्चात आयोग के सदस्य बने थे। इसकी प्रथम सीढ़ी डूंगरपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश खोड़निया थे तत्पश्चात सीढ़ी दर सीढ़ी मामला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तक पहुंचा और उन महानुभावों के अथक कथित प्रयासों से बाबूलाल कटारा राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य मनोनीत हो गये। पेपर लीक प्रकरण के मुख्य सूत्रधार कटारा ने इस डील के माध्यम से सदस्यता हासिल की थी। उस कथित डील को लेकर वादे के मुताबिक कटारा ने दिनेश खोड़निया के सहयोगी को दो बार चालीस चालीस लाख रुपये की किश्तें भी अदा की थी।
कटारा की इस स्वीकारोक्ति से तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के आरोपों की पुष्टि भी होती है। उन्होंने आयोग के सदस्यों की नियुक्ति का मामला पूरे जोर शोर से उठाया कि सदस्यों की नियुक्ति को लेकर पारदर्शिता का अभाव है। आयोग और अन्य मुद्दों को लेकर पायलट ने अजमेर से जयपुर तक पैदल मार्च भी किया था। अब कटारा के खुलासे से पायलट के आरोपों पर मुहर लग गई है। विदित हो कटारा विभिन्न प्रश्न पत्रों के बेचने के गंभीर आरोप में जेल काट रहे हैं लेकिन कटारा के इस खुलासे से भ्रष्टाचार की आग निश्चित रूप से अशोक गहलोत तक जायेगी। इस मामले में अशोक गहलोत की भूमिका पर भी प्रश्न चिन्ह लगने लाजमी है क्योंकि जांच एजेंसियों ने गहलोत के पीएसओ रहे एक अधिकारी को भी इस प्रकरण में गिरफ्तार किया है। विदित हो कि गहलोत सरकार में आयोग में नियुक्त दो सदस्य श्रीमति संगीता आर्य और मंजू शर्मा ने इस्तीफा दे दिया क्योंकि उन दोनों की भूमिका पर भी सवालिया निशान था। अब कटारा के इस सनसनीखेज खुलासे से यही प्रतीत होता है कि भारतीय राजनीति में भ्रष्टाचार रगों में बैठ गया है। राजनीति अब सेवा भाव व जन सेवा का काम न होकर एक व्यापार हो गया है। व्यापार में अच्छे रिटर्न के लिए निवेश किया जाता है, उसी कड़ी में एक बार निवेश करने के बाद अच्छे रिटर्न के परिणाम देखने को मिलते हैं। जैसा कि राजस्थान के तीन विधायकों पर आरोप लगे हैं लेकिन वही बात है कि राजनीति की काली कोठरी में कोई भी भ्रष्टाचार से वंचित नहीं है क्योंकि कहावत है कि ईमानदार तभी तक है जब तक पकड़ा न जाए।