बीकानेर(नारायण उपाध्याय)। पुलिस थाना जसरासर ने हत्या के एक सनसनीखेज मामले में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए दो वर्षों से फरार चल रहे तीन वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों पर 15-15 हजार रुपए का इनाम घोषित था। यह वारदात विधानसभा आम चुनाव-2023 के मतदान दिवस के दौरान हुई थी, जिससे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई थी। पुलिस के अनुसार 26 नवंबर 2023 को परिवादी ने रिपोर्ट दी थी कि आरोपियों ने उसके परिजन के साथ जानलेवा मारपीट कर मोबाइल और 25 हजार रुपए लूट लिए। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की इलाज के दौरान अस्पताल में मौत हो गई, जिस पर हत्या का प्रकरण दर्ज कर तत्कालीन थानाधिकारी द्वारा अनुसंधान शुरू किया गया। चुनाव जैसे संवेदनशील समय में हुई इस घटना के कारण पुलिस को अतिरिक्त बल लगाकर स्थिति संभालनी पड़ी थी।
बीकानेर रेंज आईजी हेमंत शर्मा,जिला पुलिस अधीक्षक कावेन्द्र सिंह सागर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) बनवारी लाल मीणा के निर्देशानुसार तथा वृत्ताधिकारी नोखा जरनैल सिंह के सुपरविजन में विशेष टीम का गठन किया गया। थानाधिकारी आलोक सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल सर्विलांस और गुप्त सूचनाओं के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की।
पुलिस जांच में सामने आया कि घटना के बाद से तीनों आरोपी लगातार राज्य और राज्य से बाहर अलग-अलग स्थानों पर छिपते रहे। वे अहमदाबाद, मुंबई, बैंगलोर, सिलीगुड़ी, कोलकाता, गुवाहाटी, ईटानगर, आगरा, असम, छत्तीसगढ़ सहित कई स्थानों पर फरारी काटते रहे। यहां तक कि नेपाल में भी छिपने का प्रयास किया। पहचान छिपाने के लिए मजदूरी और खेती जैसे काम किए गए। बावजूद इसके पुलिस टीम ने धैर्यपूर्ण रणनीति अपनाते हुए किसान और मजदूर का भेष धारण कर स्थानीय स्तर पर आसूचना जुटाई और अंततः उड़ीसा-छत्तीसगढ़ बॉर्डर के पास महासमुंद (छत्तीसगढ़) से तीनों को दबोच लिया।
गिरफ्तार आरोपियों में हडमानराम (32), सीताराम (30) और पवन (21) पुत्र अन्नाराम, निवासी बैरासर थाना जसरासर, जिला बीकानेर शामिल हैं। गिरफ्तारी के दौरान कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रही।
इस कार्रवाई में जसरासर थानाधिकारी आलोक सिंह, उपनिरीक्षक जयकिशन, हेड कांस्टेबल देवाराम, कांस्टेबल हरिनाथ, कैलाश, शिवप्रकाश, सुमित और बलवान सहित टीम के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं साइबर सेल बीकानेर के उपनिरीक्षक दीपक यादव और दिलीप सिंह द्वारा किए गए तकनीकी विश्लेषण से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस करने में अहम मदद मिली।