निवाई (लालचंद सैनी): शहर के दशहरा मैदान के पास पनप रही अवैध कॉलोनियों के खिलाफ शुक्रवार को प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। उपखण्ड अधिकारी (एसडीएम) प्रीति मीना के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा और अवैध निर्माणों पर 'पीला पंजा' (बुलडोजर) चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया। हालांकि, ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई विवादों से घिर गई। मौके पर मौजूद खातेदारों और स्थानीय लोगों ने अधिकारियों पर 'पिक एंड चूज' (चुन-चुनकर कार्रवाई) की नीति अपनाने और भेदभाव करने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
*एक ही जगह दोहरे नियम: 4469 पर कार्रवाई, 4538 पर नरमी*
प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पीड़ित पक्ष ने बताया कि कार्रवाई में समानता नहीं बरती गई
*सख्ती:* प्रशासन ने खसरा संख्या 4469 और 4470 पर तो तुरंत सख्ती दिखाते हुए धारा 177 के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया।
*नरमी:* वहीं पास में ही स्थित खसरा संख्या 4538/2 और 4538/4 में समान परिस्थितियां होने के बावजूद धारा 177 की कार्रवाई नहीं की गई। लोगों का सवाल है कि जब नियम एक हैं, तो कार्रवाई अलग-अलग क्यों।
*सरकारी जमीन पर कब्जे की अनदेखी*
स्थानीय नागरिकों ने एक और बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि खसरा संख्या 4538/2 व 4538/4 के पास स्थित खसरा संख्या 4538/1 में करीब 15 बिस्वा सरकारी भूमि (सिवाय चक) है। आरोप है कि इस सरकारी जमीन को आज तक अतिक्रमण मुक्त नहीं करवाया गया है और वहां भी भू-माफियाओं द्वारा अवैध रूप से प्लॉटिंग की तैयारी की जा रही है, जिस पर प्रशासन मौन है।
*हमने कन्वर्जन की फाइल तैयार की, फिर भी कार्रवाई*
मौके पर विरोध जता रहे खातेदार मूलचंद सैनी, दौलतराम सैनी और रवि सैनी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि हमने जमीन के कन्वर्जन (रूपांतरण) के लिए पूरी कागजी कार्यवाही तैयार कर ली थी, इसके बावजूद हमारे खिलाफ धारा 177 की कार्रवाई कर दी गई, जबकि पड़ोस में ही दूसरे नंबरों में अवैध कॉलोनियां कट रही हैं, वहां प्रशासन ने देखा तक नहीं। यह खुला पक्षपात नहीं तो और क्या है.
*पूरी टीम रही मौजूद*
कार्रवाई के दौरान उपखण्ड अधिकारी के साथ नगर पालिका और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम मौजूद थी। इसमें प्रमुख रूप से नगर पालिका कनिष्ठ अभियंता पप्पूलाल मीना, स्वास्थ्य निरीक्षक गजेंद्र सिंह, कस्बा पटवारी जीतराम चौधरी, नगर पालिका कनिष्ठ सहायक रोडूलाल सैनी, कर्मचारी विनोद और रामबाबू शामिल रहे। प्रशासन की इस कार्रवाई से अवैध कॉलोनाइजरों में हड़कंप जरूर मचा है, लेकिन जिस तरह से चुनिंदा खसरा नंबरों को निशाना बनाया गया, उससे इस अभियान की निष्पक्षता कटघरे में खड़ी हो गई है।