तीन विधायकों द्वारा विधायक निधी की अनुशंसा या स्वीकृति को लेकर चालीस प्रतिशत लेने के गंभीर आरोप को लेकर राजस्थान की सियासत गरमाई हुई है। तीनों आरोपी विधायकों रेवंत राम डागा, अनीता जाटव व ऋतु बनावत को विधानसभा की सदाचार समिति ने उनका पक्ष रखने के लिए तलब किया है। समिति के अध्यक्ष कैलाश वर्मा के अनुसार उन तीनों विधायको को अपना पक्ष रखने के लिए मौका दिया जाएगा। विधानसभा सदाचार समिति के द्वारा तलब किए जाने पर आश लगाई जा रही थी कि तीनों विधायको पर कार्यवाही की जायेगी। इसको लेकर सदाचार समिति के पुराने रेकार्ड पर गौर करना भी जरूरी हो जाता है। विदित हो बीएपी के विधायक जयकृष्ण पटेल पर पैसे लेकर विधानसभा में प्रश्न उठाने के गंभीर आरोप लगे थे। विधानसभा अध्यक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सदाचार समिति को सौंपी थी लेकिन मामले के सात माह गुजर जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को नहीं दी है। जय कृष्ण पटेल पर विधानसभा में पूछे गये प्रश्न को वापिस लेने पर रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे थे। एसीबी ने विधायक जयकृष्ण पटेल को जयपुर स्थित उनके आवास पर 4 मई 2025 को गिरफ्तार किया था। एसीबी ने अपनी प्राथमिक जांच में पाया कि पटेल ने खान के आवंटन और खनिज निकालने के प्रकरण को लेकर तीन सवाल विधानसभा में लगायें थे लेकिन जवाब आने से पहले ही कथित सौदा कर लिया गया। चूंकि मामला विधानसभा से जुड़ा था, इसलिए विधानसभा अध्यक्ष ने इसको सदाचार समिति को सौंप दिया लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट का इंतजार है। इस स्टिंग ऑपरेशन में फंसे एक विधायक ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को पत्र लिखकर पत्रकारिता को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। खुद को निर्दोष बताते हुए पत्रकार पर एक षड्यंत्र के तहत ब्लैकमेलिंग करने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही विधायक ने अपने पत्र में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की है। यह सर्व विदित है कि राजनीति में जब तक कोई पकड़ा न जाए सभी राजा हरिश्चंद्र का अवतार मानते हैं और पकड़े जाने पर उनके विरूद्ध षड्यंत्र की बू दिखाई देती है। एक सामान्य दरी की 25000 रूपये मे खरीद की अनुशंसा करने वाले विधायक और अधिकारी खुद को दूध का धुला कह रहे हैं लेकिन डबल इंजन सरकार की मंशा मामले की गंभीरता को नजर अंदाज कर लीपापोती का प्रयास नजर आता है।
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