आजादी के 78 साल बाद भी धूल फांकने को मजबूर बच्चे, खड़काली की ढाणियों में कब खत्म होगा ‘सड़क का वनवास

AYUSH ANTIMA
By -
0

नागौर। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच नागौर जिले की खड़काली ग्राम पंचायत से एक ऐसी सच्चाई सामने आई है, जो सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर करती है। गोदारों, कस्वों और स्वामियों की ढाणियों में रहने वाले करीब 200 परिवार आज भी पक्की सड़क के इंतजार में हैं। गलनी से कालड़ी फांटा तक करीब पांच किलोमीटर का रास्ता आज भी कच्चा, पथरीला और धूल से भरा हुआ है, जिससे ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किलों में घिरी हुई है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ रही है। भारी बस्ते पीठ पर लादे बच्चे उबड़-खाबड़ रास्तों पर पैदल चलने को मजबूर हैं, स्कूल पहुंचने से पहले ही उनका दम जवाब दे जाता है। रास्ते में जगह-जगह पत्थर और गड्ढे होने से साइकिल चलाना मुश्किल हो गया है, कई बार बच्चे गिरकर चोटिल भी हो जाते हैं। धूल भरे रास्ते के कारण स्कूल पहुंचते-पहुंचते बच्चों की ड्रेस और जूते पूरी तरह गंदे हो जाते हैं, जिससे उन्हें मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सड़क नहीं होने का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी साफ दिख रहा है। आपात स्थिति में ढाणियों तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती, जिससे बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में भारी दिक्कतें आती हैं। सामाजिक कार्यकर्ता गेनाराम कस्वा ने बताया कि ग्रामीणों ने गलनी से कालड़ी फांटा तक सड़क निर्माण की मांग को लेकर नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल को ज्ञापन सौंपा था, जिस पर सांसद ने सिफारिश भी की, लेकिन राजनीतिक भेदभाव के चलते यह प्रस्ताव फाइलों में ही अटका हुआ है। करीब सात महीने बीत जाने के बावजूद सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के 78 साल बाद भी अगर ढाणियों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित रहना पड़े, तो यह विकास के दावों पर बड़ा सवाल है।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!