झुंझुनू (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): श्री लावरेश्वर महादेव प्रभु की असीम अनुकम्पा में श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ का आध्यात्मिक आयोजन श्री लावरेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट की ओर से मंदिर के (पैतीसवें) वार्षिकोत्सव-बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर 21 जनवरी से 27 जनवरी 2026 तक किया जा रहा है। विश्व विख्यात श्रद्धेय श्री परमेश्वर लाल जी गुरुकृपा कोलकाता निवासी के कोकिल कंठ से मधुर संगीतमय कीर्तन तथा सरल हिंदी भाषा में रोचक एवं ज्ञानराज्ञ दृष्टांत सहित प्रवचन होंगे। पुण्यभूमि श्री झुंझनू धाम में सात दिन तक अपूर्व रसमयी भागवत कथा होगी। श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ को लेकर मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी राजकुमार अग्रवाल एवं परमेश्वर हलवाई ने रविवार सुबह 11:45 बजे कथा में प्रति दिवस प्रसाद वितरण, भवन में रुकने की एवं भोजन इत्यादि व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियों पर विस्तृत रूप से चर्चा की। साथ ही कथा स्थल श्री लावरेश्वर महादेव मन्दिर के सामने, स्व.श्री लीलाधर जी मोदी का नोहरा का अवलोकन कर आवश्यक साफ सफाई करने, कथा में पंडाल एवं स्टेज डेकोरेशन के लिए डेकोरेटर माँ भगवती आर्ट के आशीष श्रीमोहन तुलस्यान एवं टेंट के लिए रामावतार जांगिड़ को आवश्यक दिशा निर्देश दिये।
इस अवसर पर स्थानीय कार्यकारिणी सदस्य श्रीकांत पंसारी एवं डॉ.डीएन तुलस्यान उपस्थित थे।
*श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ समय मध्याह 1.00 बजे से सायं 5.00 बजे तक का रहेगा*
जानकारी देते हुए ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं अध्यक्ष इंद्र कुमार मोदी दिल्ली ने बताया कि कथा में प्रथम दिवस बुधवार, 21 जनवरी को श्रीमद्भागवत् कथा महात्मय, गोकर्ण उपाख्यान 24 अवतार-विराट वर्णन, श्री शुक्रदेव आगमन, बृहस्पतिवार, 22 जनवरी, 2026 ध्रुव चरित्र, जड़भरत कथा, शुक्रवार, 23 जनवरी प्रहलाद चरित्र, वामन अवतार, शनिवार, 24 जनवरी 2026 श्रीराम अवतार, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव ( नन्दोत्सव), रविवार, 25 जनवरी, 2026 श्रीकृष्ण बाल-लीला, गोवर्धन उत्सव, सोमवार, 26 जनवरी बैकुण्ठ दर्शन, कंस वध, रुक्मणी विवाह, मंगलवार, 27 जनवरी सुदामा चरित्र के पश्चात फूलों की होली के साथ कथा को विश्राम दिया जाएगा। कथा के दौरान रविवार, 25 जनवरी को भण्डारा (महाप्रसाद) का आयोजन सायं 6.00 बजे से रात्रि 9.00 बजे तक होगा एवं 23 जनवरी को प्रातः लावरेश्वर महादेव का बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर रुद्राभिषेक किया जाएगा। विदित है कि कलिकाल में मानव कल्याण मोक्ष प्राप्ति हेतु अमृत कलशरूपी श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के श्रवण से मानव भवसागर से पार हो जाता है। श्रीमद्भागवत रूपी गंगा में स्नान से चरित्र, मन एवं तन से सरल, निर्मल होकर परमपिता परमात्मा की प्राप्ति होती है।