बीकानेर/नोखा। नोखा में 10 जनवरी 2011 को दिए गए 1 लाख 4 हजार रुपये के उधार के बदले जारी चेक के बाउंस होने से शुरू हुआ मामला आखिरकार 13 साल बाद निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बीकानेर की सेशन कोर्ट ने सोमवार को आरोपी व्यापारी भंवरलाल बिश्रोई (मेसर्स भंवरलाल श्रीकिशन, कृषि उपज मंडी, नोखा) की अपील को खारिज कर दिया और नोखा कोर्ट द्वारा सुनाई गई दो साल साधारण कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। अदालत ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिता शर्मा द्वारा 4 जुलाई 2024 को दिए गए निर्णय को पूर्णतया सही माना। साथ ही आदेश दिया गया कि जुर्माना राशि शिकायतकर्ता कुदसू निवासी शंकरलाल पुत्र भंवरलाल को दी जाए। जुर्माना जमा नहीं करने पर आरोपी को एक माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
मामले के अनुसार शिकायतकर्ता शंकरलाल ने 10 जनवरी 2011 को डेढ़ प्रतिशत मासिक ब्याज पर भंवरलाल को 1 लाख 4 हजार रुपये उधार दिए थे। अदायगी के लिए आरोपी ने एसबीबीजे नोखा शाखा का चेक जारी किया, जो अपर्याप्त धनराशि के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद शंकरलाल ने 2 जून 2012 को एनआई एक्ट के तहत नोखा कोर्ट में परिवाद पेश किया। तीन दिसंबर 2014 को ट्रायल कोर्ट ने भंवरलाल को दोषी माना, लेकिन सजा में तकनीकी खामियों का हवाला देकर आरोपित की ओर से अपील दायर की गई। नौ मई 2017 को अपर सेशन जज-04 बीकानेर ने दोषसिद्धि को तो सही ठहराया, मगर सजा पुनर्निर्धारण के लिए मामला वापस मजिस्ट्रेट कोर्ट भेज दिया। लगभग दस वर्ष बाद 4 जुलाई 2024 को मजिस्ट्रेट न्यायालय ने पुनः सुनवाई करते हुए दो साल कैद और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा तय की। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने सेशन कोर्ट में फिर अपील दायर की, जिसे सोमवार को अदालत ने खारिज कर दिया। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता धर्मपाल ने पैरवी की।