बिजली विभाग के अधिकारियों की तानाशाही से शहर का आमजन हो रहा है परेशान

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद सैनी): इसे लापरवाही कहे या मिली भगत, कारण कुछ भी हो लेकिन इससे बिजली विभाग की पोल जरूर खुल जाती है। बिजली विभाग द्वारा शहरवासियों को जान बूझकर परेशान किया जा रहा है। बिजली की शिकायत दर्ज करवाने के बाद भी लोगों को मजबूर होकर दो-तीन दिन तक अंधेरे में रहना पड़ रहा है। अधिकांश लोग तो मजबूर होकर इन्हीं के कर्मचारियों से पैसे देकर अपनी बिजली को चालू करवा लेते हैं। बताया जाता है कि अधिकारियों से बात करते हैं तो उनकी तरफ से यह जवाब आता है कि विभाग की जैसी व्यवस्था है, वैसे ही काम होगा जबकि विभाग द्वारा बिजली की शिकायत का समाधान करने का 3 घंटे का समय दिया गया है। विभाग के अधिकारी यह तक बोल देते हैं की बारिश में हमारे पास तीन सौ शिकायत प्रतिदिन आ जाती है। हमारे पास एक गाड़ी है, उसकी क्षमता प्रतिदिन सौ शिकायतों का समाधान करने की है, अब हम इसमें कुछ भी नहीं कर सकते हैं, गाड़ी जयपुर के अधिकारियों के अनुसार उपलब्ध करवाई जाती है, हमारे पास जैसी व्यवस्था है, वैसे ही काम होगा, चाहे उसमें तीन दिन लगे या चार दिन लगे। इस दौरान आप अंधेरे में रहो या गर्मी से परेशान रहो, हम इसमें कुछ भी नहीं कर सकते हैं। लोगों ने बताया कि राजनेताओं के पास इनकी शिकायत करते हैं तो राजनेता भी इन अधिकारियों का ही पक्ष लेते हैं, अब हमें मजबूर होकर या तो अंधेरे में रहना पड़ता है या अपने पैसे से बिजली चालू करवानी पड़ती है। लोगों ने यहां तक बताया कि अगर कोई भ्रष्ट विभाग है तो उसमें सबसे ज्यादा बिजली विभाग है। बताया जाता है कि कई कॉलोनियों में लोड नहीं आने पर उन कॉलोनीवासियों ने विभाग को पैसे देकर ट्रांसफार्मर रखवाए गए हैं। जानकारी के अनुसार विभाग के अधिकारी सीधे पैसे नहीं लेते हैं, प्राइवेट कर्मचारियों के माध्यम से लेन देन करते हैं। बताया जाता है कि किसी भी काम को लेकर अधिकारियों से बात करने पर अधिकारी मना कर देते हैं, कोई न कोई बहाना बना लेते हैं, फिर प्राइवेट कर्मचारियों से बात करने पर वह कार्य की सहमति देकर खर्चा बता देते हैं। इसके अलावा समय भी बता देते हैं कि आपका कार्य इतने दिनों में होगा, यहां तक बोल देते हैं कि ऐसा नहीं करोगे तो फिर विभाग के चक्कर काटते रहना, इससे कहीं ना कहीं आरोप सत्य साबित होता नजर आ रहा है।

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