राजस्थान में अवैध खनन को लेकर सीबीआई द्वारा मंथर गति से जांच होने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। इसको लेकर सीबीआई ने माननीय न्यायालय को बताया कि संयुक्त जांच के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। राज्य सरकार व पुलिस अपेक्षित सहयोग नहीं कर रही है, इसके अलावा जांच के लिए जरूरी बल (नफरी) भी उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है। इसको लेकर माननीय हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सीबीआई जैसी उच्च स्तरीय जांच में भी अगर संसाधनों की कमी की बात हो रही है तो न्याय की उम्मीद कैसे की जायेगी। इसी तरह का आरोप राजस्थान विधानसभा में भाजपा के ही एक विधायक ने लगाए हैं, जिससे सरकार कटघरे में खड़ी नजर आ रही है। राजस्थान में डबल इंजन सरकार है जो सुशासन व भ्रष्टाचार में जीरो टोलरेंस की बात करती है लेकिन इस डबल इंजन सरकार का एक डिब्बा इसको पटरी से उतारते हुए नजर आ रहे हैं। सीबीआई के बयान पर मुहर लगाते हुए पूर्व मंत्री व भाजपा विधायक अजय किलक ने राजस्थान विधानसभा के बजट अधिवेशन में गृह मंत्रालय की अनुदान मांगों कि बहस में अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़े करते हुए कहा कि प्रदेश अवैध खनन पुलिस के संरक्षण में हो रहा है क्योंकि लिखित में शिकायत करने के बावजूद कार्यवाही नहीं हो रही बल्कि शिक़ायत कर्ता को डराया धमकाया जा रहा है। पुलिस अवैध खनन करने वालों को रोकने की बजाय उन्हें संरक्षण दे रही है। सीबीआई व भाजपा विधायक के बयानों को देखें तो डबल इंजन सरकार पर प्रश्नचिन्ह लगना वाजिब है। हाईकोर्ट से लेकर राजस्थान विधानसभा तक पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। विधानसभा में जो आरोप लगाए गये है, वह कोई विपक्ष का विधायक नहीं बल्कि भाजपा से है और सरकार भी भाजपा की ही है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को सीबीआई व अपनी ही पार्टी के विधायक द्वारा दिये गये बयानों को गंभीरता से लेना होगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि किसी भी अवैध काम करने वाले व्यक्ति की पहुंच बहुत लंबी होती है। गाडफादर के संरक्षण बिना कोई भी अवैध काम करना संभव नहीं है। झुन्झुनू जिले में भी अवैध खनन जोरों पर है लेकिन कहा गया है कि जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का ।
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