रानीवाड़ा/जालौर (महेन्द्र देवासी): माधापर-भुजोड़ी हाईवे स्थित श्री वर्धमान नगर (साउथ) जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में शनिवार को पूज्यपाद 451 दीक्षा दानेश्वरी आचार्य श्री गुणरत्न सूरीश्वरजी महाराजा के कृपापात्र एवं 500 श्रमणीगण नायक जैनाचार्य श्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी महाराज की निश्रा में शास्त्रीय सामायिक का भव्य आयोजन हुआ। इस अवसर पर श्री विमलनाथ जिनालय से बाजे-गाजे के साथ सफेद वस्त्रों में सुसज्जित आराधकों ने शोभायात्रा निकालते हुए श्री अचलगच्छ उपाश्रय पहुंचकर शास्त्रीय सामायिक की आराधना की। अपने प्रेरक प्रवचन में जैनाचार्य श्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी ने कहा कि भगवान महावीर (वर्धमान) न तो स्वयं किसी से डरते थे और न ही किसी को डराते थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन तप, जप और आत्मसाधना में समर्पित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग तप, जप और खप (समर्पण) से ही प्रशस्त होता है।
गुरुदेव ने श्री भुज तपगच्छ जैन संघ द्वारा संचालित "हर घर सिद्धितप, घर-घर सिद्धितप" अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि सिद्धपद की प्राप्ति के लिए प्रत्येक परिवार को सिद्धितप की आराधना, लाख नवकार मंत्र का जाप तथा नियमित जिनवाणी श्रवण का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने इसे समाज के लिए आध्यात्मिक सुरक्षा कवच बताया। आचार्यश्री के करकमलों से आशीर्वाद स्वरूप 'सिद्धितप' पास प्राप्त करने के लिए बच्चों, युवाओं, महिलाओं एवं वरिष्ठजनों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। सामायिक में भाग लेने वाले प्रत्येक आराधक को 150 रुपये की प्रभावना भी प्रदान की गई। इस अवसर पर जैनाचार्य श्री ने भूकंप के बाद अमेरिका की जैन संस्था जैना के सहयोग से निर्मित वर्धमान विद्यालय के विद्यार्थियों को भी संबोधित किया। उन्होंने बच्चों को 'वर्धमान' शब्द का वास्तविक अर्थ बताते हुए संस्कार, अनुशासन और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उल्लेखनीय है कि आचार्यश्री अब तक 200 से अधिक स्कूलों एवं महाविद्यालयों में प्रवचन देकर विद्यार्थियों को नैतिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा का संदेश दे चुके हैं। कार्यक्रम के अंत में बताया गया कि जैनाचार्य श्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी महाराज रविवार, सोमवार एवं मंगलवार को भुज स्थित जैन आराधना भवन संघ में विराजमान रहकर धर्मसभा एवं प्रवचन प्रदान करेंगे।