अपनी अपनी डफ़ली अपना अपना राग

AYUSH ANTIMA
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भारतीय जनता पार्टी अपने पितृ पुरूष और जनसंघ के संस्थापक डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती स्मरण पक्ष के रूप में मनाती हैं। उनकी विचारधारा भाजपा के मूल में है। एक देश, दो विधान, दो प्रधान और दो निशान न चलने का नारा बुलंद किया था। उनके राष्ट्रवादी विचार, सेवा और समर्पण का भाव आज भी प्रेरणास्रोत हैं। उनको राष्ट्रवाद के प्रखर संवाहक के रूप में याद किया जाता है। राष्ट्र की एकता व अखंडता के वह प्रबल समर्थक थे लेकिन अब उनकी जयंती पर झुनझुनु मुख्यालय पर हुए आयोजन को उनके विचारो के परिप्रेक्ष्य में देखें तो जब भाजपा कुनबा ही एकता का प्रदर्शन नहीं कर रहा तो राष्ट्र की एकता की बात करना बेमानी होगा क्योंकि एकता का शंखनाद अपने कुनबे से ही होता है। सूत्रों की मानें तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर झुनझुनु मुख्यालय पर चार जगह आयोजन देखने को मिले, जो एकता के उनके उवाच की पोल खोल रहा है। खंड खंड विभक्त भाजपा जिला संगठन ने का यह प्रदर्शन उनकी विचारधारा के अनुरूप ही था। इसका मूल कारण संगठन में आयातित नेताओं का बोलबाला है, जिनका कभी भी जनसंघ व भाजपा के सिध्दांतों व विचारधारा से दूर का रिश्ता नहीं है। यह नेता बस सत्ता के साथ रहना चाहते हैं क्योंकि झुनझुनु जिला आयाराम गयाराम की राजनीति के लिए विख्यात है। झुंझुनूं जिलाध्यक्ष की हठधर्मिता का ही परिणाम है कि जिला मुख्यालय पर चार जगह आयोजन करके अपने वर्चस्व को दिखाना चाहते हैं और जिलाध्यक्ष इस खंड खंड विभक्त संगठन से या तो अनभिज्ञ हैं या जान बूझकर आंखें बंद किए हुए हैं। यदि इस आयोजन को संगठनात्मक पकड़ की दृष्टि से देखें तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर जिला मुख्यालय पर भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक एकरूपता का प्रदर्शन नहीं कर सकी। एक ही दिन, एक ही अवसर पर चार अलग-अलग स्थानों में आयोजित कार्यक्रम जिले में भाजपा के संगठनात्मक ढांचे पर प्रश्न चिन्ह खड़े करता है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी को अनुशासित कार्यकर्त्ताओं की टीम को लेकर जाना जाता रहा है। जिले मे इस बात को लेकर चर्चा रही कि जब सभी कार्यक्रमों का उद्देश्य एक ही था तो जिला भारतीय जनता पार्टी संगठन ने एक मंच पर आने से परहेज़ क्यों किया। इस कार्यक्रम ने गुटबाजी को हवा देने के साथ ही उस दावे की पोल खोल दी है कि जिले मे भारतीय जनता पार्टी का कुनबा एकजुट है। इसको लेकर तो यही कहा जा सकता है कि संगठन के पदाधिकारियो ने अपनी अपनी डफ़ली अपना अपना राग वाले सिध्दांत को अपना लिया है।

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