नोखा/बीकानेर (मुकेश रामावत): गुरु पूर्णिमा महोत्सव के तहत श्री बालाजी सेवा धाम में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के चौथे दिन शनिवार को श्रद्धा और आध्यात्मिकता का अद्भुत नजारा देखने को मिला। दोपहर 12:15 बजे शुरू हुई कथा में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने पंडाल को भर दिया। अनंत श्री विभूषित महामण्डलेश्वर आचार्य श्री बजरंग दास जी महाराज ने माँ की महिमा और महर्षि सुखदेव जी के जीवन प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। कथा में आचार्य श्री ने कहा कि माँ केवल जन्मदात्री नहीं, वह जीवन की प्रथम गुरु और संस्कारों की नींव है। उन्होंने कहा कि माता-पिता का सम्मान और गुरु का आशीर्वाद ही जीवन को सफलता की ओर ले जाता है।
माँ के त्याग और निस्वार्थ प्रेम की बात करते हुए महाराज ने कहा, "पुत्र कुपुत्र हो सकता है, लेकिन माँ कभी कुमाता नहीं होती।" संतान कितनी भी गलतियाँ कर ले, माँ का हृदय हमेशा उसके भले की ही कामना करता है। उन्होंने सभी से माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानने का आह्वान किया। आचार्य श्री ने महर्षि सुखदेव जी के जन्म और वैराग्यपूर्ण जीवन का प्रसंग सुनाकर ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का संदेश दिया। साथ ही देवशयनी एकादशी से शुरू होने वाले चातुर्मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस अवधि में जप, तप, दान और सत्संग से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। आयोजन समिति के पुखराज सांखी ने बताया कि 22 से 29 जुलाई तक प्रतिदिन दोपहर 12:15 से 4:15 बजे तक कथा होगी। दूर से आने वाले भक्तों के लिए निःशुल्क बस, भोजन और आवास की व्यवस्था की गई है। गुरु पूर्णिमा पर विशेष कार्यक्रम भी होंगे: सुबह 8:15 बजे गुरु पूजन, 9:15 बजे हवन-यज्ञ, 10:15 बजे गुरु आशीर्वाद और 12:15 बजे विशाल भंडारा। कथा में राजस्थान के अलावा मध्य प्रदेश, गुजरात, यूपी और हरियाणा से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे समय भजन और कथा से वातावरण भक्तिमय बना रहा।