वर्धमान नगर में जैनाचार्य रश्मिरत्न सूरीश्वरजी के संस्कारमय प्रवचन, विद्यार्थियों को दिलाए श्रेष्ठ जीवन के संकल्प

AYUSH ANTIMA
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रानीवाड़ा/जालौर (महेन्द्र देवासी): 500 श्रमणीगण नायक जैनाचार्य श्री रश्मिरत्न सूरीश्वरजी महाराज अपनी धवल सेना के साथ भुजोड़ी-वर्धमान नगर जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ में पधारे। इस अवसर पर उन्होंने 'संस्कारी भव्य भारत निर्माण' के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से धर्मसभा को संबोधित करते हुए चातुर्मास में धारण किए जाने वाले आध्यात्मिक 'नौ गहनों (नौ दगीना)' का विस्तृत महत्व समझाया। जैनाचार्य श्री ने बताया कि संस्कार ही व्यक्ति, समाज और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि अब तक गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के 200 से अधिक विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संस्कारप्रधान प्रवचन देकर विद्यार्थियों को नैतिक जीवन के लिए प्रेरित किया जा चुका है।
वर्धमान विद्यालय में आयोजित विशेष प्रवचन के दौरान जैनाचार्य श्री ने विद्यार्थियों को सत्य, अनुशासन, माता-पिता एवं गुरुजनों के सम्मान, नशामुक्ति, संयम तथा सदाचार का पालन करने का संकल्प दिलाया। विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती हंसाबेन पंड्या ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे प्रेरणादायी प्रवचन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संघ प्रमुख राहुल मेहता, मंत्री हसमुख भाई वोरा, चेतन भाई, भाविन भाई तथा मीडिया कन्वेनर विश्रुत भाई ने बताया कि 11 जुलाई, शनिवार को श्री वर्धमान नगर जैन संघ के इतिहास में पहली बार शास्त्रीय सामायिक का आयोजन किया जाएगा। प्रातः 7:30 से 9:30 बजे तक आराधक श्री विमलनाथ जिनालय में एकत्रित होकर बाजे-गाजे के साथ श्री अचलगच्छ उपाश्रय के हॉल में पहुंचेंगे और सामूहिक शास्त्रीय सामायिक करेंगे। उन्होंने बताया कि आयोजन के दौरान सभी श्रद्धालु व्हाइट एंड व्हाइट ड्रेस कोड का पालन करेंगे। मोबाइल एवं आभूषणों का त्याग कर मौनव्रत धारण करते हुए श्रद्धालु इस विशेष धार्मिक आराधना में सहभागी बनेंगे।

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