निवाई (लालचंद माली): अर्जुन नगर से बाईपास की ओर नगर पालिका द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित किए जा रहे नाले की गुणवत्ता की हकीकत मानसून की पहली ही बारिश ने उजागर कर दी। निर्माणाधीन नाले की दीवारों में जगह-जगह दरारें पड़ गई हैं, लेकिन जिम्मेदार तकनीकी अधिकारी कार्रवाई करने के बजाय मौन साधे बैठे हैं। हालात ऐसे हैं कि निर्माण में आई गंभीर खामियों के बावजूद विभाग की चुप्पी अब कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नाले के निर्माण में बजरी के स्थान पर डस्ट का उपयोग किया गया। दीवारों का निर्माण सूखे पत्थरों से कर ऊपर से केवल सीमेंट-बजरी की परत चढ़ाकर अंदर की घटिया गुणवत्ता को छिपाने का प्रयास किया गया। इतना ही नहीं, भीषण गर्मी में निर्माण होने के बावजूद दीवारों की आवश्यक तराई तक नहीं कराई गई, जिससे निर्माण शुरू से ही कमजोर साबित हुआ। रहवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि नाले की पर्स में आवश्यक पिचिंग नहीं की गई और मात्र लगभग तीन इंच सीसी बिछाकर गुणवत्ता का दिखावा किया गया। कई बार शिकायत करने के बावजूद तकनीकी अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। अब जब पहली बारिश में ही नाले की दीवारों में दरारें उभर आई हैं तो ठेकेदार उन दरारों पर सीमेंट लगाकर लिपापोती करने में जुटा हुआ है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इस तरह की मरम्मत का 'ज्ञान' किसकी मौन स्वीकृति से दिया जा रहा है। मामले को लेकर क्षेत्रवासियों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण पहली बारिश भी नहीं झेल पाया तो यह सीधे-सीधे गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदार की कथित मिलीभगत के कारण आमजन की गाढ़ी कमाई को पानी में बहाया जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तकनीकी अधिकारी घटिया निर्माण की निष्पक्ष जांच कर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, या फिर चुपचाप भुगतान कर पूरे मामले पर पर्दा डाल दिया जाएगा, साथ ही यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर तकनीकी परीक्षण, गुणवत्ता प्रमाणन और ऑडिट जैसी व्यवस्थाओं के बावजूद ऐसे निर्माणों को गुणवत्तापूर्ण कैसे घोषित कर दिया जाता है।
क्षेत्रवासियों ने निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र तकनीकी जांच कर दोषी अधिकारियों और ठेकेदार के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में सरकारी धन का दुरुपयोग रोका जा सके।