वर्तमान समय में सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए हिन्दू धर्म के देवी देवताओं पर सार्वजनिक आपत्तिजनक टिप्पणी करना आम बात हो गई है। इसे अक्सर राजनीतिक, व्यक्तिगत लाभ या विवादो का माध्यम बना लिया गया है। सनातन धर्म की मान्यताओं, परम्पराओं व देवी देवताओं पर जो टिप्पणी करते हैं, वे अक्सर मूल दर्शन, इतिहास और उसके उच्चतम मूल्यों से अनजान होते हैं। हिन्दू देवी देवताओं पर मंचों से आपत्तिजनक टिप्पणी करना या उपहास करना एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अक्सर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है। राजस्थान के शेखावाटी अंचल में स्थित खाटू श्याम जी मंदिर एक प्रमुख व विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। महाभारत के वीर बर्बरीक जो घटोत्कच के पुत्र थे, उनको श्याम बाबा के रूप में पूजा जाता है। खाटू श्याम जी को हारे का सहारा भी कहा जाता है, जहां लाखों श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती है। फाल्गुन महीने में लक्खी मेले का आयोजन होता है, उस समय लाखों श्याम भक्त पैदल खाटू श्याम जी पहुंचते हैं। वर्तमान में खाटू श्याम जी पर कथित ब्रह्म ऋषि किरीट भाई, जो श्याम बाबा पर अमर्यादित टिप्पणी करके सुर्खियों में है। यह स्वयंभु ब्रह्म ऋषि गुजरात से है, यह तो बहुत ही अच्छा है कि केवल ब्रह्म ऋषि बता रहे हैं, वैसे गुजरात में व्यक्ति जन्म नहीं लेता अवतार लेता है। अजमेर में कथावाचक किरीट भाई ने श्याम बाबा और उसके मंदिर को लेकर गलत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि खाटू श्याम जी घटोत्कच नामक राक्षसी के बेटे थे। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि जिस तरह अग्रवाल का बेटा अग्रवाल होता है, वैसे ही राक्षस का बेटा भी राक्षस ही होता है। श्रीकृष्ण के साथ खाटू श्याम जी का कोई संबंध नहीं है। उसका मंदिर होना, उसकी उपासना करना व पूजा करना वेदों में वर्जित है। अब उस कथित ब्रह्म ऋषि के पास कौन से वेद है और उसने कहाँ से इतना ज्ञान प्राप्त किया यह तो वह स्वयं ही बता पाएगा। इसके साथ ही उसने खाटू श्याम जाने वाले श्याम भक्तो पर भी अनर्गल टिप्पणी की। इसके साथ ही श्याम भक्तो की धार्मिक भावनाएं आहत होने को लेकर भारी आक्रोश देखने को मिला। अपने बयान को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की आवाज भी जोर शोर से उठने लगी। श्री श्याम मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मोहन दास जी महाराज ने कहा कि किरीट भाई की माफी तभी स्वीकार होगी, जब वे खाटू स्थित मंदिर में आकर श्याम बाबा से माफी मांगेंगे। अजमेर में व्यासपीठ से बाबा श्याम को लेकर कथित टिप्पणी के बाद देश भर में श्याम भक्तो में आये उबाल के मध्यनजर किरीट भाई ने श्री श्याम मंदिर में बाबा के दर्शन कर शीश नवाया और कथित टिप्पणी को लेकर क्षमा याचना की। यह सनातन धर्म के विशाल व मानवीय ह्रदय का परिचायक ही था कि बाबा श्याम के चरणो मे शीश नवाकर माफी मांगने पर श्याम भक्तो ने उसे अभयदान दे दिया। व्यासपीठ की गद्दी पर प्रवचन व कथा करने वाले महानुभावों को अपनी वाणी पर काबू रखने के साथ ही खुद को ब्रह्म ऋषि कहलाने से बाज आना चाहिए।
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