अलवर (श्रीराम इंदौरिया): राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय अलवर के पेंशनर्स वार्ड में संचालित जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में शुक्रवार को विश्व बौद्धिक दिव्यांगता दिवस मनाया गया, जिसमें अभिभावकों हेतु कार्यशाला आयोजित की गई तथा विशेष बच्चों को शिक्षण सामग्री वितरित कर उनका सम्मान किया गया। मंथन फाउंडेशन के संस्थापक डॉ.पीयूष गोस्वामी ने बौद्धिक अक्षमता के कारणों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह अवस्था जेनेटिक हो सकती है या फिर बचपन में कोई गंभीर बीमारी या इन्फेक्शन की वजह से भी हो सकती है। प्रसव के दौरान बच्चे में ऑक्सीजन की कमी या फिर दिमागी चोट भी इसकी वजह हो सकती है। प्रारंभिक लक्षणों में यदि कोई बच्चा डेवलपमेंट डिले अर्थात चलने बोलने या टॉयलेट ट्रेनिंग में देरी होना, चीजों के समझने में परेशानी, बोलने या दूसरों से बात करने में मुश्किल होती हो, साथ ही भावनाओं को संभालने में परेशानी हो सकती है। बौद्धिक दिव्यांगता की जाँच के लिए आईक्यू टेस्ट, अडाप्टिव बिहेवियर और डेवलपमेंट असेसमेंट की मदद ली जाती है, वहीं मंथन सचिव व रिहैब साइकोलॉजिस्ट डॉ.सविता गोस्वामी ने बताया कि हर बच्चा अलग तरीके से सीखता है। अगर इन बच्चों को सहयोग और सही तरीका मिले तो वे बहुत कुछ सीख सकते हैं। इन बच्चों के विकास में परिवार, विशेष शिक्षक, स्पीच थेरापिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट, साइकोलॉजिस्ट एवं समाज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। नियमित प्रशिक्षण, धैर्य, प्यार और प्रोत्साहन इन्हें आत्मनिर्भर बनने एवं समाज की मुख्य धारा से जुड़ने में मदद करते हैं। डीडीआरसी प्रबंधक आर.एस.वर्मा ने डीडीआरसी की प्रगति रिपोर्ट बताते हुए कहा कि गत 9 महीने में जिले के करीब 500 से अधिक दिव्यांग केंद्र पर संचालित विभिन्न सुविधाओं का लाभ ले चुके हैं। इसमें 200 से अधिक दिव्यांगों के यूडीआईडी रजिस्ट्रेशन एवं करेक्शन एवं 21 दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण (व्हीलचेयर, बैसाखी एवं स्वर्ण यंत्र, वॉकर) दिए गए व 100 से अधिक दिव्यांगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, स्वरोजगार ऋण योजना, स्कूटी योजना, रेल एवं बस पास, स्कालरशिप, पालनहार, कॉक्लियर इंप्लांट आदि की जानकारी एवं सहायता प्रदान की गई, साथ ही 200 से अधिक दिव्यांगों को विभिन्न थेरेपीज प्रदान की गई। डीडीआरसी कॉर्डिनेटर डॉ.पीयूष गोस्वामी ने बताया कि सेंटर पर रोजाना 15-20 दिव्यांग थेरेपी के लिए आ रहे हैं। जिसमें अधिकतर बच्चे हैं और ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, सेरिब्रल पाल्सी, श्रवण बाधिता, डाउन सिंड्रोम, एडीएचडी, न्यूरो डेवलपमेंट डिसऑर्डर आदि से ग्रसित हैं। सेंटर में दी जा रही थेरेपी से इन बच्चों में सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। जो बच्चे चल फिर नहीं पाते थे, थेरेपी के बाद चलने, फिरने में समर्थ होने लगे हैं, साथ ही ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चे बोलने और भाषा को समझने के साथ साथ शिक्षा से भी जुड़ रहे हैं। केंद्र में फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट, स्पीच थेरापिस्ट, विशेष शिक्षकों, केयर गिवर, कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन वर्कर आदि प्रोफेशनल अपनी सेवाएँ दे रहे हैं, साथ ही उन्होंने बताया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के दिव्यांग सशक्तिकरण मंत्रालय द्वारा संचालित यह योजना दिव्यांगों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने में प्रभावकारी सिद्ध हो रही है एवं इस योजना से ना केवल अलवर जिले के, बल्कि आस पास के जिले जैसे भरतपुर, दौसा, कोटपूतली-बहरोड़, खैरथल-तिजारा से भी दिव्यांगों को लाभ प्राप्त हो रहा है। आगामी रूपरेखाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि जिले में तहसील और ग्राम पंचायत स्तर पर दिव्यांगों की शीघ्र पहचान एवं दिव्यांगता के कारणों एवं उनके निवारण पर जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में बड़ोदामेव निवासी जगदीश को श्रवण यंत्र दिया गया। इस दौरान डीडीआरसी स्टाफ, बच्चे एवं अभिभावक उपस्थित रहे।
जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में मनाया गया विश्व बौद्धिक दिव्यांगता दिवस
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July 25, 2026
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