राजस्थान में पंचायत राज व नगर निकाय चुनावों को लेकर विधायिका और न्याय पालिका में टकराव की स्थिति बन गई है। प्रजातांत्रिक व्यवस्था में चुनाव टालना आमजन के अधिकारों के हनन के रूप में देखा जाना चाहिए। राजस्थान में स्थानीय निकायों व पंचायतो के चुनावों लगातार हो रही देरी के कारण माननीय हाईकोर्ट ने सख्त रूख अपनाते हुए राज्य सरकार, चुनाव आयोग व ओबीसी आयोग को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए चेतावनी दी कि यदि अधिकारी चुनाव करवाने में असमर्थ हैं तो वे हाईकोर्ट से अधिकारी नियुक्त कर चुनाव करवा देंगे। विदित हो पिछली बार 22 मई को हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि 31 अगस्त तक अवश्य चुनाव हो जाने चाहिए। इसका पालन न करने पर कोर्ट ने कहा कि बार बार समय मांगना स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकार व निर्वाचन आयोग को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि वे 20 जुलाई को चुनाव का पूरा विस्तृत कार्यक्रम अदालत में पेश करें। कोर्ट ने ओबीसी आयोग को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब आयोग का गठन समय पर कर दिया तो अभी तक रिपोर्ट क्यों नहीं सौपी गई। हाईकोर्ट के एक्टिंग जस्टिस संजीव कुमार शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंड पीठ ने साफ कहा कि प्रशासनिक दिक्कतों की आड़ में अदालती आदेशो को ठंडे बस्ते में नहीं डाला जा सकता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार उसे सख्त फैसले लेने के लिए मजबूर न करें। सरकार की तरफ से चुनावो में देरी को लेकर ढीकरा ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में हो रही देरी को लेकर फोड़ा, जिसकी वजह से सीटों का वर्गीकरण अटका हुआ है। इसके साथ ही कोर्ट ने ओबीसी आयोग को भी यह बताने के लिए कहा कि वह अपनी रिपोर्ट कब देगा और राज्य सरकार लाटरी की प्रकिया कब करेगा। अब उपरोक्त हाईकोर्ट के फैसले के संदर्भ में देखें तो सरकार की प्रशासनिक विफलता है कि कोर्ट ने यह कहते हुए कि चुनाव कोर्ट अधिकारी भेज कर करवा देगा, यह सरकार की भारी प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है। निकाय चुनावों को फुटबाल बना दिया गया है, आयोग सरकार को व सरकार आयोग को दोषी मान रही है। अब यदि कोर्ट के सख्त आदेश को लेकर भाजपा में मची गुटबाजी को देखें, जिसके कारण भजन लाल शर्मा चुनाव करवाने से कतरा रहे हैं। सूत्रों की माने तो चुनावों के मध्यनजर संगठन महामंत्री की संभागवार बैठकों का दौर शुरु हो गया है। इन बैठको में जो पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओ को दरकिनार किया गया, उनको साथ लेकर चलने की कवायद हो रही है। संगठन महामंत्री भरतपुर, अजमेर , उदयपुर, जोधपुर, कोटा और बीकानेर संभाग की बैठकें ले चुके हैं। इन बैठको में सांसद, विधायक, जिलाध्यक्ष, मोर्चा पदाधिकारी व संगठन व भाजपा के निष्ठावान व समर्पित पुराने कार्यकर्ता शामिल हुए लेकिन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ नजर नहीं आये तो पार्टी के भीतर कई तरह की चर्चाओं को बल मिला। भाजपा के लिए पंचायत व निकाय चुनाव केवल स्थानीय चुनाव नहीं बल्कि 2028 के विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल है व मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की साख से जुड़ा मुद्दा भी है। अब जयपुर संभाग की बैठक जयपुर में न होकर जयपुर से बाहर खाटूश्यामजी में प्रस्तावित है, इसको लेकर धार्मिक आस्था को भुनाने के रूप में देखा जा रहा है।
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