नीमराना: कस्बे स्थित जीण माता मंदिर के पास नर्मदेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक बालकृष्ण भूपेंद्र महाराज वृंदावन के द्वारा भागवत में बताया गया कि भगवान विष्णु समय-समय पर धर्म की रक्षा के लिए अलग-अलग अवतार लेते हैं। राम और कृष्ण दोनों विष्णु भगवान के ही अवतार हैं। भगवान राम का अवतार त्रेता युग रावण, मेघनाथ और राक्षसों के अत्याचार से पृथ्वी और देवता दुखी थे। पृथ्वी ने गाय का रूप लेकर भगवान से प्रार्थना की। राजा दशरथ की 3 रानियां थीं। कौशल्या, कैकेयी, सुमित्रा, भगवान विष्णु ने कौशल्या के गर्भ से, श्रीराम ने कैकेयी से भरत और सुमित्रा से लक्ष्मण-शत्रुघ्न के रूप में जन्म लिया। अयोध्या में चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी के दिन जन्म हुआ। भगवान कृष्ण का अवतार द्वापर युग में कंस, जरासंध, शिशुपाल जैसे अत्याचारी राजाओं ने पृथ्वी का भार बढ़ा दिया था। देवकी माता की प्रार्थना पर भगवान आए।मथुरा में कंस की जेल में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की रात को देवकी-वसुदेव के घर जन्म लेते ही 4 भुजा वाला विष्णु रूप दिखाया, फिर बालक बन गए, रात में ही गोकुल में नंद बाबा के घर पहुंचा दिए। राम हमें सिखाते हैं कि कैसे जीना है धर्म, मर्यादा, त्याग। कृष्ण हमें सिखाते हैं कि कैसे प्रेम और भक्ति करनी है। समर्पण, गीता, सखा भाव रखना चाहिए। इस मौके पर रमेश खंडेलवाल, गीता देवी, मुकेश खंडेलवाल, किरण योगी, पिंकी, राजबाला, सुनीता, सुशील, निशा, आशा, कृष्णा, बदामी देवी, विद्या, राधा, प्रेम, सुनीता, रिंकू खंडेलवाल, महेंद्र खंडेलवाल, अन्य महिला व ग्रामीण मौजूद रहे।
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