बहरोड़: विश्व बौद्धिक दिव्यांग दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को एक कार्यशाला का आयोजन एमडीवीएम पारले स्कूल में किया गया। जिसमें अभिभावकों, बच्चों और टीचर्स के साथ सेशन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य बौद्धिक दिव्यांगता के प्रति जागरूकता के साथ इन बच्चों का शिक्षा में समावेशन था। कार्यशाला में रिहैब साइकोलॉजिस्ट एवं होम्योपैथी चिकित्सक डॉ.सविता गोस्वामी ने बताया कि बौद्धिक दिव्यांगता जेनेटिक हो सकती है या गर्भावस्था या बाद में किसी चोट या इन्फेक्शन भी इसकी वजह हो सकती है। डिस्लेक्सिया, सेरिब्रल पाल्सी, डाउन सिंड्रोम, फ्रैजाइल एक्स सिंड्रोम आदि प्रकारों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इन बच्चों को सीखने, समझने, समस्याओं को सुलझाने रोजमर्रा के सामाजिक एवं व्यावहारिक कार्यों को पूरा करने में दिक्कत होती है, जो इनके आईक्यू लेवल को प्रभावित करती हैं, पर साथ ही इनमें अनेक प्रतिभाएं भी होती हैं।
शिक्षा हर बच्चे का हक है, ऐसे में बौद्धिक दिव्यांग बच्चों को भी शिक्षा से अलग नहीं किया जा सकता। पियर ग्रुप एवं इन बच्चों के पाठ्यक्रम में संशोधन के माध्यम से हम इन बच्चों को शिक्षित कर सकते हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा भी बौद्धिक दिव्यांग बच्चों को विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जिसमें यूडीआईडी, स्क्राइब, स्कालरशिप एवं रिजर्वेशन आदि शामिल हैं। अगर इन बच्चों के अंदर छुपी प्रतिभा को पहचान कर उस पर कार्य किया जाए और इनको समानता का अधिकार प्राप्त हो तो ये भी सशक्त समाज का निर्माण करने में सक्षम हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम एवं एडीएचडी न्यूरो डेवलपमेंट डिसऑर्डर के बारे में भी जानकारी प्रदान की। शीघ्र पहचान से काफ़ी मदद मिलती है जिसमें साइकिलॉजिस्ट, ऑक्यूपेशनल थेरेपी, स्पीच थेरेपी, बिहेवियर मॉडिफिकेशन आदि की बड़ी भूमिका रहती है। अंत में विद्यालय प्राचार्य नीति धामी ने डॉ.गोस्वामी का आभार व्यक्त किया तथा मंथन फाउंडेशन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कार्यशाला में बच्चों ने भी काफ़ी उत्साह से भाग लिया तथा अंतिम सत्र ‘हमने क्या सीखा’ में सटीक व सकारात्मक उत्तर दिए। कार्यशाला में मंथन फाउंडेशन के संस्थापक एवं जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र अलवर कोऑर्डिनेटर डॉ.पीयूष गोस्वामी, काउंसलर नीलम यादव, निर्मल सिंह सहित शिक्षकगण, अभिभावक व विद्यार्थी उपस्थित रहें।