रामगढ़/अलवर (श्रीराम इंदौरिया): दलित अधिकार केन्द्र के तत्वावधान में ग्राम पाली, तहसील रामगढ़, जिला अलवर में दलित महिला समूह के साथ चर्चा बैठक आयोजित की गई। बैठक का उद्देश्य दलित महिलाओं को संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों, शिक्षा, नेतृत्व विकास, आर्थिक आत्मनिर्भरता तथा महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अत्याचार, हिंसा एवं भेदभाव के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें संगठित एवं सशक्त बनाना था। बैठक को संबोधित करते हुए दलित अधिकार केन्द्र के जिला समन्वयक शैलेष गौतम ने संस्था का परिचय देते हुए कहा कि दलित अधिकार केन्द्र विगत लगभग 20 वर्षों से राजस्थान में दलित महिलाओं, दलित मानवाधिकारों एवं सामाजिक न्याय के मुद्दों पर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी दलित महिलाओं को जातिगत भेदभाव, लैंगिक असमानता, सामाजिक बहिष्कार, आर्थिक शोषण एवं विभिन्न प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ता है। संविधान द्वारा प्रदत्त समानता, स्वतंत्रता, गरिमा एवं न्याय के अधिकारों के बावजूद जानकारी के अभाव में अनेक महिलाएँ अपने अधिकारों का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाती हैं। उन्होंने महिलाओं से भारतीय संविधान, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न से संरक्षण अधिनियम सहित अन्य महत्वपूर्ण कानूनों एवं सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर शिक्षा, संगठन और नेतृत्व के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक रूप से सशक्त बनने का आह्वान किया। सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश गौतम ने कहा कि दलित समुदाय आज भी सम्मान, समान अवसर एवं मानवाधिकारों की स्थापना के लिए संघर्षरत है। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त भेदभाव एवं अन्याय के विरुद्ध संवैधानिक मूल्यों के आधार पर संगठित होकर कार्य करना समय की आवश्यकता है। पंचायत समिति सदस्य नीलम गौतम ने कहा कि जब तक दलित महिलाएँ शिक्षित, जागरूक एवं आत्मनिर्भर नहीं होंगी, तब तक उनका सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक शोषण पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। उन्होंने महिलाओं से स्थानीय स्तर पर नेतृत्व विकसित कर निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। समूह अध्यक्ष राजंती ने कहा कि महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाते हुए सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाना चाहिए तथा स्वरोजगार, कौशल विकास एवं बचत के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। समूह सचिव शालू ने दलित महिलाओं की वर्तमान सामाजिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं की एकजुटता, शिक्षा एवं जागरूकता ही उन्हें शोषण, हिंसा एवं भेदभाव के विरुद्ध सशक्त बना सकती है।बबैठक में किरण देवी, प्रेम देवी सहित समूह की महिलाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा, सरकारी योजनाओं तक पहुँच एवं महिलाओं से जुड़े विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की।बैठक का समापन दलित महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा, नेतृत्व विकास एवं आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर संगठित होकर कार्य करने के संकल्प के साथ हुआ।
दलित महिलाओं के संवैधानिक अधिकार, नेतृत्व विकास एवं सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण पर चर्चा बैठक आयोजित
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July 26, 2026
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