आओ पेड़ लगाते हैं,
इस धरा को स्वर्ग बनाते हैं।
एक पेड़ लगे माँ के नाम,
ऐसा शुभ संकल्प निभाते हैं।
पेड़ केवल पेड़ नहीं,
जीवन के आधार हैं।
खड़े हैं मौन तपस्वी की भाँति,
सृष्टि के पालनहार हैं।
कट रहे हैं लाखों रोज़ाना,
हम बेबस और लाचार हैं।
बन बैठे हैं धृतराष्ट्र,
क्या यही सदाचार है।
अब नहीं समझे, तो कब समझोगे।
इस पर कुछ विचार करो,
पेड़ लगाकर धरती का श्रृंगार करो।
विरासत में हरियाली का संसार मिला,
देश मिला प्यारा हिंदुस्तान।
नदियाँ, वन, स्वच्छ हवा का,
बुजुर्गों से उपहार मिला।
आने वाली पीढ़ी को संदेश मिले, ऐसा हम प्रचार करें,
एक पेड़ माँ के नाम लगाकर,
धरती माँ पर उपकार करें।