बीकानेर (मुकेश रामावत): जिले के रासीसार पुरोहितान गांव में मंगलवार को आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर हंगामे की भेंट चढ़ गया। बिजली, पानी और राजस्व संबंधी समस्याओं को लेकर शिविर में पहुंचे सैकड़ों ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर जमकर विरोध जताया और शिविर का बहिष्कार कर दिया।ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने शिविर तो लगा दिया, लेकिन मौके पर तहसीलदार, बीडीओ या डिस्कॉम-जलदाय विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं था। केवल पटवारी और निचले स्तर के कर्मचारी भेज दिए गए, जो उनकी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम नहीं थे। गांव में पिछले कई महीनों से बिजली कटौती, लो वोल्टेज, पेयजल संकट और नामांतरण-खाता दुरुस्ती जैसे काम लंबित हैं। इन्हीं समस्याओं को लेकर ग्रामीण सुबह से शिविर में जमा हुए थे। अधिकारियों के न मिलने पर उनका गुस्सा फूट पड़ा।
आक्रोशित ग्रामीणों ने शिविर स्थल पर ही धरना लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि "सेवा शिविर" के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है। जनता की समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है। इस दौरान कांग्रेस प्रदेश महासचिव पर्यावरण प्रकोष्ठ के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को समर्थन देते हुए प्रशासन से मांग की कि 7 दिन में उच्चाधिकारी गांव में जनसुनवाई कर समस्याओं का निस्तारण करें। धरने पर बैठे ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सक्षम अधिकारी गांव में आकर समाधान नहीं करते हैं तो वे जिला कलेक्ट्रेट पर बड़ा प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों के विरोध के बाद कर्मचारी बिना काम पूरा किए ही लौट गए।